30/04/08

मुझे शिकायत हे.

हम लोगो मे कितने ऎसे लोग हे जो दुसरे को संकट मे देख कर मदद करते हे,कितने ......

मुझे शिकायात हे ऎसे लोगो से जो किसी लडकी या बुजुर्ग कॊ तगं किये जाने पर या मुसिबत मे देख कर चुप रहते हे,या वहा से खिसक जाते हे, या फ़िर तमाशा देखते हे, कभी यह नही सोचते कल इन मे हमारी मां, बहिन ओर बेटी भी हो सकती हे,अगर आज हम किसी को गुण्डो से बचायेगे, उस मुसिबत मे इन की मदद करे गे तो कल हमारी भी कोई दुसरा मदद करे गा,

4 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

अब मर्द रह गए हैं गिने चुने। सामाजिक अहसास ही रीतता जा रहा है।

अभिषेक ओझा said...

Agar aapki shikayaton pe kuchh log bhi gaur karein to bahut bhala ho jaayega is samaaj ka...
mere blog par diye gaye aashirvaad ka aabhaari rahunga, aur kya kahoon ... aashirvaad ka to dhanyavaad bhi to nahin diya jaa sakta.

राज भाटिय़ा said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी शिकायत वाजिब है!