04/04/08

एक शराबी जी की कथा

हमने बचपन मे बहुत कथा सुनी हे, करवा चोथ की कथा, शनि बार की कथा, संतोषी माता की कथा, ओर भी बहुत सी कथा सुनी, अभी सब मुंह जबानी याद हे, कुछ दिन पहले हमारे पडोसी पर भी ऎसा ही कुछ हुया तो हमने सोचा चलो उन पर भी एक कथा लिख ली जाये.
सारे सजन ओर सजनिया ध्यान से सुने, फ़िर इस पर अमल करे या ना करे यह आप की अपनी मर्जी हे, हमारे ललु राम ( पडोसी ) जी रोजाना शराब पी कर घर आते, वेसे हमे उन से इस बारे कोई शिकायत नही, लेकिन जब वो रोजाना पियेगे तो घर का वजट भी गडवडा जाता हे, फ़िर पडोसी होने के नाते हमारे वजट पर भी थोडा बहुत असर पडता हे, कभी आटा कभी सब्जी की मांग , एक दिन मन मे आया की देखे तो सही ल्लु जी रोजाना पीते क्यो हे ? शनि वार को मोका देख कर हमे ललु जी को घर पर चाय पर बुलाया,बातो बातो मे हमने उन की उस आदत के बारे बात की, सुनते ही बोले भाटिया जी कया करु इस लडाकी बीबी ने जीना हराम कर रखा हे, घर मे आते ही चिखना चिल्लान शुरु कर देती हे, सारा दिन काम करो, ओर घर आओ तो इस से लडो, बस इसी लिये रोजाना पी लेता हू, हम ने समझाया देखो थोडे दिन तुम मत पियो, फ़िर देखो तुमहारी बीबी भी केसे बदल जाती हे, ओर तुम एक दम से नही तो धीरे धीरे पीना कम करो, ओर जब भी घर मे घुसो चुप चाप रहॊ, लडाई नही होगी, फ़िर ललु जी चले गये, फ़िर हमारी बीबी ने ललु जी की बीबी को भी समझाया देखो पति जब घर आये तो एक दम मत उबल पडो, उसे प्यार से समझाओ, प्यार से बात करो तो वो धीरे धीरे पीना भी बन्द कर देगा, तुम जब नही लडो गी तो वो खुद ही बो बाल कर चुप हो जाये गा,ओर उन्हे भी चाय पीला कर रुख्सत किया,
उसी रात नया हगामां हो गया, ललु जी पर तो हमारे समझाने का असर नही हुया, लेकिन उन की बीबी कॊ हमारी बीबी की बात अच्छी लगी,ओर रात को जब ललु जी फ़िर से पी कर घर आये तो बीबी ने बडे प्यार से कहा आईये आप बेठिये, मे आप के लिये पीने के लिये पानी लाती हु लेकिन पहले आप के जुते उतार दु आप आराम से बेठे, इतना सुनाना था की ललु जी ने झट से कहा बहिन जी माफ़ करे मे गलती से आप के घर आ गया हु,
बहिन जी सुनते ही ललु की बीबी को गुस्सा तो आया लेकिन बह उन्हे फ़िर से समझाने लगी, ओर तभी शोर सुन कर हम ललु जी घर गये तो सारी बात मालुम पडी ओर हमे ललु जी कॊ समझाना चाहा, कि भाई यह ही आप की बीबी हे, तो ललु जी झट से बोले मे अपनी बीबी को अच्छी तरह से जानाता हु, वो इतने प्यार से कभी भी नही बोल सकती,
अब ललु जी कि मदद कोन करे

4 comments:

Dr. Chandra Kumar Jain said...

आपकी हर पोस्ट में एक संदेश
निहित है.पढ़कर अच्छा लगता है कि
अच्छी बातों के लिए भी कितना सार्थक
लेखन संभव है .
आभार !

कुन्नू सिंह said...

पढकर बहुत मजा आया!!
आज का दीन बहुत अच्छा है यहां पर बारीस हो रही है। मजेदार मजेदार कहानी लीखते रहीये मुझे पढ्ने मे बहुत मजा आता है (कहानीयां पढने मे मजा आता है। स्कुल का कीताब पढ्ने मे नींद आने लगती है)

राज भाटिय़ा said...

चन्द्र कुमार जी ओर कुन्न भाई आप का धन्यवाद,आते रहिये ओर हिम्मत देते रहे

mehek said...

:):)very nice