15/03/08

चिंतन गर्व

आज का चिंतन महतमा गाधी जी के एक स्संकरण से हे, जिस से हमे शिक्षा मिलती हे, हम जेसे भी हे,जिस भी रंग के, जिस भी भेस भुसा के हे हमे अपने आप पर गर्व होना चहिये, हम किसी से छोटे या नीचे नही हे,ओर हमारे समाने वाला भी हमारी तरह से ही उस ईशवर का बनया हुया हे,जिस ने हमे बनया हे,ओर किसी बडे से मिल कर अपने आप को किस्मत वाला समझ कर अपने को छोटा मत बनाओ,यानि हमारे मन मे कभी भी हीन भावना नही आनी चहिये,जात पात, रंग भेद,ओर भाषा को ले कर..तो लिजिये आज का चिंतन
चिंतन गर्व
एक बार इग्लेन्ड की महारानी ने गांधी से मिलने की इच्छा जहिर की, ओर महत्मा गांधी जी कॊ महारानी का निमंत्रन पत्र राजदुत के हाथो भेजा गया, ओर गांधी जी ने स्वीकार किया,निश्चचित दिन गांधी जी इग्लेण्ड मे रानी से मिलने उन के महल मे पहुचे,गांधी जी को देख कर,रानी के खास सेकेटरी ने कहा श्रिमान गांधी जी, आप थोडी देर मे ही इगलेण्ड की महारानी से मिलने वाले हे, उस से पहले क्रयपा उस कमरे मे जा कर युरोपियन सुट पहन ले ( पेंट कोट ओर टाई )क्यो कि आप इन कपडो मे आधे नंगे दिखते हे,
गांधी जी उस गोरे की बात सुन कर बिलकुल भी बिचलित नही हुये, ना हि नाराज हुये, ना ही गुस्सा हुये, बल्कि मुस्कुरा कर बोले,भाई आप की रानी मुझ से मिलना चाहती हे,यह रानी की इच्छा हे,मेरी नही, ओर अगर रानी मुझ से मिलना चाहती हे तो मेरे इन्ही कपडो मे मिले, ओर कम से कम देखे तो सही अग्रेज मेरे देश का कया हाल करके आये हे,उस सोने की चिडिया को लुट कर मेरे जेसा अध्नगां कर दिया हे.महल मे सब ओर खुसर पुसर होने लगी, ओर गांधी जी को उन्ही कपडो मे रानी से मिलने दिया,ओर गांधी जी भी ऎसे मिले जेसे दो बराबर के लोग मिलते हे.

1 comment:

अनुनाद सिंह said...

गांधी जी का उक्त आचरण किसी भी अल्प-आत्मविश्वासी को पूर्ण-आत्मविश्वासी बनाने की क्षमता रखता है।

बहुत अच्चा लगा पढ़कर!