04/07/17

अरे हम तो पोस्ट लिखना ही भुल गये , कैसे लिखे ओर कैसे पोस्ट करे ???? चलिये अब यहां तक पहुच गये हे तो पोस्ट भी लिख दे, लेकिन क्या लिखे ???? वो भारतिया मित्र जो पहली बार युरोप ओर अमेरिका कनाडा वगेरा आते हे, यह पोस्ट उन के नाम से... हम भारतिया जहां भी किसी सुंदर बच्चे को देखते हे झट से प्यार जताने लगते हे, बच्चे के गालो को दोनो हाथो से प्यार से सहलायेगे, अरे बाबा यह सब भारत मे चलता हे, यहां युरोप वगेरा मे नही, मेरे कई मित्र ऎसा करते हे तो मुसिबत मे फ़ंस सकते हे, हम यहां बच्चा तो बहुत दुर की बात हे किसी के कुत्ते को भी हाथ लगाना हो, कुछ खाने के लिये देना हो तो पहले उस के मालिक से इजाजत लेते हे, ओर बच्चे के मामले मे तो ... तो सज्जनओ जब भी यहां आओ अपने हाथो पर कंटोल रखो, कही प्यार दिखाते दिखाते... बेइज्जत मत करवा लेना , कही लेने के देने ना पड जाये,

12 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (05-07-2017) को "गोल-गोल है दुनिया सारी" (चर्चा अंक-2656) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

ताऊ रामपुरिया said...

इसीळिये तो हम यूरोप नही आते भला बच्चों को दुलारने में कयों तकलीफ़ होनी चाहिये.:)
रामराम
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

कृपया कैप्चा हटा लिजिये.
सादर

Khushdeep Sehgal said...

अच्छी सलाह...

जय #हिन्दी_ब्लॉगिंग...

राज भाटिय़ा said...

ताऊ जी मै बहुत कुछ भुल गया हुं ब्लागं मे, अब यह कैप्चा कैसे हटाऊ बताओ....

राज भाटिय़ा said...

वैसे मुझे उम्मीद नही थी कोई टिपण्णी आयेगी, क्योकि पांच साल से मैने लिखा ही नही यहां कुछ, आप सब का धन्यवाद

SANDEEP PANWAR said...

मेरी रीडर सूची में बहुत सारे ब्लॉग है, जो ठीक लगा, वहाँ कमेंट भी कभी कभार कर ही देता हूँ यात्रा वाले एक नहीं छोडता

अन्तर सोहिल said...

किसी बच्चे की तरफ़ मुस्कुराने या जीभ निकाल कर चिढाने पर तो पेरेंट्स से परमीशन नहीं लेनी पडेगी ना....? :-)
प्रणाम स्वीकार कीजियेगा

vandana gupta said...

वो तो मान ली आपकी बात लेकिन बेइज्जती क्यों करते हैं वो? ऐसा क्या कह देते हैं जरा विस्तार से बताते

Rohit Singh said...

जी बच्चों को दूर से देखना होगा...समझ गए...अगर आए यूरोप तो....बाकी देखने का टैक्स तो नहीं लगेगा ना।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

सायकिल चलाना या तैरना एक बार सीखने पर कहाँ भूलता है वैसे ही यह भी है :-)

राज भाटिय़ा said...

यहां बेगाने बच्चो को इस लिये हम सहला नही सकते , कि कही हमारे हाथो मे किसी प्रकार के बेकटिरियन हो जिस से बच्चे को कुछ हानि हो, यह लोग साफ़ दिल के होते हे, यह हमे टोक देगे या डांट देगे कि आप ने बच्चे को क्यो छुआ, ओर उस समय हम अपनी बेइज्जत महसुस करते हे, अच्छा हे किसी गेर के बच्चे को प्यार करने से पहले पुछ ले, जीभ् निकालना बच्चो को बुरी आदत माना जाता हे, दुर से बच्चो को देखो, प्यार से देखो कोई दिक्कत नही

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (10-07-2017) को "एक देश एक टैक्स" (चर्चा अंक-2662) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'