31/05/12

कलयुग आ गया ?

बहुत दिनो के बाद आज मन ने कहा चलो आज कुछ लिखे, तो सोचा क्या लिखूं? तभी मन ने कहा जो तुम इस दुनिया मे देखते हे वोही लिखो....यह कोई कहानी नही एक सच्ची घटना हे, जो आज मै आप सब के सामने रख रहा हुं कुछ आंखॊ देखी तो कुछ कानो सुनी... पिछली बार जब अपने शहर गया तो देखा कि बिल्लो भाभी(बदला हुआ नाम) जो उम्र मे हम से बहुत बडी थी, अपनी कोठी के गेट पर भिखारियो की तरह बेठी थी, बाल बिखरे हुये, लगता था शायद कई दिनो से नहाई ना हो,शरीर बहुत कमजोर सा,आंखे धंसी हुयी सी,तभी कोठी का गेट खुला ओर एक नोकर एक अखबार मे रात का बचा हुआ खाना भाभी के सामने रख गया, मुझे बहुत अजीब सा लगा, अजीब इस लिये कि कभी इस भाभी की आवाज ही इस घर का कानून होती थी, जो कह दिया सो कह दिया....ओर आज..... मैने भाभी को राम राम कही ओर उन के पांव छुये,थोडी देर तो मुझे ताकती रही फ़िर बोली राज तू कब आया, मैने कहा अभी अभी.... फ़िर भाभी खुब रोने लगी ओर अपने लडको को खुब कोसे ओर कहने लगी कि राज देख कलयुग आ गया हे, मैने इन बच्चो के लिये क्या कुछ नही किया ओर इन कमीनो ने अपनी बीबियो के कहने पर मेरा हाल क्या कर दिया....भाभी के पास से बहुत बदबू भी आ रही थी, मै कुछ देर बेठा ओर फ़िर अपने घर वापिस आ गया. फ़िर भाभी की बाते कि राज **कलयुग आ गया हे*** मेरे कानो मे गुजने लगी, मुझे वो दिन याद आये जब एक दिन अचानक मे भाभी के घर गया तो देखा था कि उस की सास घर मे झाडू पोंछे लगा रही थी, ओर भाभी आराम से ए सी रुम मे बेठी थी, जब की सास को गठिया रोग होने के कारण ऊठना भी कठिन था, लेकिन वो फ़िर भी चूतडो के बल घिस घिस कर पोंछे लगा रही थी, एक दिन भाभी के घर से बहुत जोर जोर से रोने की आवाज आई, हम सब पडोसी भागे गये तो देखा कि बुढिया सास गर्म पानी के कारण जल गई थी ओर चीख रही थी... जब हम सब गये ओर भाभी सफ़ाई देने लगी कि मेरे हाथ से गर्म पानी की बाल्टी गिर गई हे, ओर बुढिया बोली देख झुठ मत बोल मैने तुझे नहाने के लिये पानी मांगा तो तुने ठंडा बर्फ़ जैसा पानी दे दिया, जब मैने गर्म पानी देने को बोला तो तुने कहा ले मर नहा गर्म पानी से ओर सारी बालटी गर्म पानी की मेरे ऊपर उडेल दी....., एक दिन भाई घर पर था, किसी काम से जाना हुआ तो मां अपने लडके के पास बेठी थी, मैने पांव छुये तो बुढिया ने हजारो आशिर्वाद दिये, तभी भाई ने कहा कि चाल पियोगे, ओर हमारे मना करने पर भी हमारे लिये चाय ओर बिस्किट आ गये, हम ने वो बिस्किट ओर चाय के लिये बुढिया मां से पूछा तो उन्होने मना कर दिया, फ़िर मैने उस भाई से मां के बारे बाते शुरु कि तो पता चला कि मां को खाना भाभी की मर्जी से ही दिया जाता हे, बाद मे पडोसियो ने बतलाया कि दो दो दिन बुढिया भुखी रहती हे, ओर बचा हुआ खाना इसे दे दिया जाता हे, जब यह अपने लडको को कहती हे तो भाभी बीच मे बोल पडती थी कि मां की यादास्त खो गई हे यह खाना खा कर भुल जाती हे, मै तो इसे सही समय पर ही खाना देती हुं.... वगेरा वगेरा.... ओर भी बहुत सी बाते ऎसी ही थी,एक दिन भाभी ने बहुत सारा खाना बनाया ओर उस दिन बुढिया को नया सूट पहनाया अपने हाथो से नहालाया, एक सप्ताह तक यह नाटक चला, तो आसपडोस वालो ने सोचा शायद बहूं सुधर गई..... बाद मे पता चला कि कोठी अब बहू के नाम हो गई हे. कुछ दिनो बाद बुढिया कोठी के गेट पर टुटी हुयी खाट पर ओर कई साल तडप तडप के एक दिन उस ने उसी जगह दम तोड दिया जहां आज भाभी बेठी थी, यह सब बाते जो मैने यहां लिखी बहुत कम हे, पता नही उस बुढिया पर क्या कुछ बीता होगा, लेकिन दुसरे दिन मै भाभी के पास गया ओर वो फ़िर से कोसने लगी अपने बच्चो को तो मैने उसे एहसास करवाया कि भाभी इस जगह तुम्हारी सास कितने साल तडपी थी ओर उस के साथ क्या क्या हुआ था, उसे याद करो आप का समय गुजर जायेगा, हां भाभी..**कलयुग आ गया हे*** ओर इसे तुम ले कर आई थी अपने साथ..... ओर भाभी एक टक मेरी तरफ़ देखने लगी...... फ़िर दुर कही आसमान की तरफ़ देखने लगी..

16 comments:

वन्दना said...

कुछ चेहरों को आईना दिखाना जरूरी होता है और दिखाना भी चाहिये शायद तभी ये समाज सुधरे।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बदक़ि‍स्‍मति‍ से यही सच भी है आज का

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

चूल्हे में जब लकड़ी जलाई जाती है तो उसका अगला सिरा जलता है लेकिन वह आग लकड़ी के पिछले हिस्से की तरफ भी बढ़ती है और फिर.....As you sow so shall you reap .

प्रवीण पाण्डेय said...

एक दिन सबको वहीं पर आकर बैठना है..कलयुग जो है..

अजय कुमार झा said...

हम पोस्टों को आंकते नहीं , बांटते भर हैं , सो आज भी बांटी हैं कुछ पोस्टें , एक आपकी भी है , लिंक पर चटका लगा दें आप पहुंच जाएंगे , आज की बुलेटिन पोस्ट पर

परमजीत सिहँ बाली said...

जैसे को तैसा हो तो कोई अफ्सोस नही होता लेकिन जब कभी ऐसे माँ-बाप जो सदा अपना फर्ज निभाते रहे हो...उनके साथ भी ऐसा होता देखते हैं तो बहुत दुख होता है...

अन्तर सोहिल said...

भाई को भी उसी चौखट पर बैठाना चाहिये

अन्तर सोहिल said...

अपनी औलाद से ताजीम की उम्मीद ना रख
अपने मां-बाप से जब तूने बगावत की है

शिवम् मिश्रा said...

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - कहीं छुट्टियाँ ... छुट्टी न कर दें ... ज़रा गौर करें - ब्लॉग बुलेटिन

विजय शर्मा said...

दुर्भाग्य से ये घटना मेरे खुद के घर मे चल रही है. मेरे मोसी के साथ पर दुःख इस बात का है की मेरी मोसी ने अपने सास की पूरी जिंदगी सेवा की और आज अपने बेटा और भोऊ की कर रही है

आशा जोगळेकर said...

सब की बारी आती है । जैसा करोगे वैसा भरोगे ।
पर कई बार अच्चा करने वालों के साथ बुरा होते देकते हैं तो.............

आशा जोगळेकर said...

बहुत दिन हुए लेख को । आशा है आप स्वस्थ हैं और कुशलपूर्वक भी ।

प्रतिभा सक्सेना said...

बहुत बुरा लगता है यह सब पढ़ कर !

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

bahut dino baad main bhi aayi... bahut din baad dekhi blog post ..par taaji post bhi bahut dino pahle kee hai..kuch naya ho jaaye ....
par sach kahte hai lakdi jal kar peeche hee aati hai ..bhabhi ne bhi usi lakdi par aag jalaai thee jisme vah khud......
kushlta bataaye apnee aik nayi post se

hem pandey(शकुनाखर) said...

एक आॅटो के पीछे लिखा देखा था-
बुरी नजर वाले तेरे बच्चे जिएं
बड़े होकर तेरा खून पिएं

Admin Deep said...

ब्लॉग पढ़ कर ऐसा लगा जैसे लेखक ने अपना दिल 💘 निकाल कर रख दिया हो।
kuldeeprsl@hotmail.com