09/03/11

हंस भी सकते हे... चाहो तो?

ब्लाग मिलन के शेष विडियो तो अगली पोस्ट मे डालूंगा, तब तक आप मजा फ़रमाऎं..

एक फ़डकता तडफ़ता लतीफ़ा हाजिर हे....


अमेरिकन.... हमारे यहां कुत्ते  फ़ुटवाल खेलते हे!!
जर्मन.... हमारे यहां फ़िश डांस करती हे !!
चाईनिश.... अजी हमारे यहां हाथी साईकिल चलाते हे !!
ताऊ....     अजी छोडो अपनी अपनी गप्पे.... हमारे यहां गधे सरकार चलाते हे !!!
ही ही ही .....

38 comments:

Er. सत्यम शिवम said...

हा हा हा....मजा आ गया।

Alok Mohan said...

हा हा हा हा
सही है हमारे यहाँ गधे ही देश चलते है

सुरेश शर्मा (कार्टूनिस्ट) said...

हा हा हा ...बेमिसाल, लाजवाब !

mahendra verma said...

आ..हा...हा...हा...हा

प्रवीण पाण्डेय said...

बाप रे बाप।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

नहले पे दहला!

ZEAL said...

ताऊ जी का जवाब नहीं ! मज़ा आ गया ।

Manoj K said...

खूब.. मजेदार है !!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

मुझे इस पर हंसी नहीं आ रही... क्षोभ हो रहा है..

मनोज कुमार said...

हा-ही-ही=हा-हा...
मज़ेदार
रोचक!!!

girish pankaj said...

ha..ha...ha....sahi baat, kharee baat...kyaa baat hai bhatiyaa ji.

सुशील बाकलीवाल said...

हा.. हा... हा.... हा.
वाकई मजेदार.

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

ज़बरदस्त है...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

यह तो सच्चाई है ...:) :)

ललित शर्मा said...

खर की ठरकी चला रही सरकार ।
दुजा कोई तो हो चलाने को तैयार।

गधों की ही मौज है।

अभिषेक मिश्र said...

Sahi hi to hai.

Vaise aaj akhbaron mein contents ke maamle mein blogging sensorship ki khabrein bhi dekhi thin, aise sarkari asuvidhajanak posts se kahin ham bhavishya mein khatron se to nahin khelne ja rahe ?

अवनीश सिंह said...

सही कहा आपने
इस देश में गदहों की विशेष इज्जत है\

Rahul Singh said...

सरकार बन बैठने को सभी उद्यत.

ajit gupta said...

वर्तमान की तो यही सच्‍चाई है।

Shah Nawaz said...

ha ha ha... Zabardast!!!!

वन्दना said...

हा हा हा……………सच ही तो कहा है।

अन्तर सोहिल said...

आप इसे लतीफा कह रहे हैं
मुझे यह तो गंभीर और सच्ची बात लगी

प्रणाम

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

हा-हा-हा-हा-हा-हा-हा-हा-हा-हा-हा.................इसीलिए हमारे ताऊ सबसे अलग और ग्रेट है ! और मैं अपने ताऊ के लिए हंस रहा हूँ इन गधों के लिए नहीं !

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

सही कहा.. हकीकत - पर कभी कभी यूं नहीं लगता कि अगर वाकई में गधे चला रहे होते तो ज्यादा बेहतर होता ...
जो भी हो आपके लतीफे ने काफी हँसा दिया ..हा हा हा ...:))))
कल यह लतीफा चर्चामंच पर होगा...

नरेश सिह राठौड़ said...

लेकिन गधो में भी इतनी समझदारी है की काला धन कहा रखना चाहिए |

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

बहुत खूब।
आज एक 'ऐसे' ही पर पोस्ट भी है।

G.N.SHAW said...

गुरूजी इस बार पढ़ने में बहुत मजा आया .. .! धन्यवाद !

Babli said...

मैं पिछले कुछ महीनों से ज़रूरी काम में व्यस्त थी इसलिए लिखने का वक़्त नहीं मिला और आपके ब्लॉग पर नहीं आ सकी!
बहुत ही रोचक और मज़ेदार लगा! ज़बरदस्त पोस्ट!

अविनाश वाचस्पति said...

एक सच्‍चाई को जोक कहना अच्‍छा नहीं लगा।

Udan Tashtari said...

हा हा! एकदम सच!!

वाणी गीत said...

:):)...
मजाक होकर भी सत्य !

Kunwar Kusumesh said...

true

Sadhana Vaid said...

मजाक मजाक में बहुत गहरी और सच्ची बात कह गाते ताऊजी ! सटीक व्यंग ! बधाई !

दिगम्बर नासवा said...

हा हा भाटिया जी पता नही था ..चुटकुला इतना सच्चा भी हो सकता है .... .

M VERMA said...

यह चुटकुला तो नहीं है हकीकत है

Swarajya karun said...

लाजवाब हकीकत .

Kajal Kumar said...

चुटकुला हो तो कोई हंसे, अब अपने नसीब पर क्या हंसना.. इसलिए हंस ही नहीं पाया.

उपेन्द्र ' उपेन ' said...

बिल्कुल चटपटा और मजेदार....