13/07/10

मै नमन करता हुं ऎसे विधायक को.... एक तरफ़ नोटो की माला पहने वाले एक तरफ़ यह....

जब भी समय होता है मै देश विदेश की अच्छी अच्छी खवे ढुढ कर पढता हुं, ओर बहुत अच्छी खबरो का लिंक अपने मित्रो को भेज देता था, ओर जिन के पास नेट नही है उन्हे प्रिंट कर के भेज देता था, ओर अब तो लिंक देने से काम चल जाता है, लिजिये एक खास खबर आप भी इसे पढे....
भारत में नेता सत्ता के ऊँचे मुकामो के लिए चुने जाने के बाद पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी या कोई कीमती खदान आवंटित करने की जुगत करते हैं, लेकिन राजस्थान में एक दलित विधायक स्कूल लेक्चरर पद के लिए अपनी विधायकी कुर्बान करने को तैयार है.आगे पढने के लिये यहां चटखा लगाये
मेरा सलाम इन को काश मेरे देश के सभी नेता ऎसे हो...... बस नाम मात्र के ईमान दर ना हो, इन जेसे बने

21 comments:

  1. zabardast...........

    kamal ki post !

    ReplyDelete
  2. सुखद खबर लगी.

    ReplyDelete
  3. प्रेरक ! लेकिन प्रेरणा लेने ककी पड़ी किसे है :)

    ReplyDelete
  4. मैंने भी पढ़ी थी ये खबर.. गुड..

    ReplyDelete
  5. बढ़िया जानकारी ..शुक्रिया भाई जी

    ReplyDelete
  6. विधायक की सोच अच्छी है लेकिन मुझे लगता है कि राजनीति से एक अच्छा आदमी कम हो गया. वैसे भी वहा घटिया लोगो की भरमार है . ऐसे अच्छे लोग भी चले जायेंगे तो कैसे चलेगा कम ..? उनको मुकाबला करना चाहिए, विधायक मतलब जनप्रतिनिधि. वे जानता के लिये लड़-भिड कर काम करा सकते है. अगर ऐसा नहीं करा सकते तो उनकी कमजोरी है. यह पलायनवाद भी है एक तरह का. लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि होने को वे कूद हलके से ले रहे है तो कोई क्या कर सकता है. उनके विचार अच्छे है. कि वे बहुत से लोगो को पढ़ा सकते है. लेकिन विधायक रह कर वे इससे ज्यादा काम कर सकते है. शाला भवन बनवा सकते है, सड़कें बनवा सकते है, दुखी जनों की मदद करवा सकते, है, उन्हें जो अनुदान मिलते है, उनसे गरीबों, असहायों की मदद कर सकते है. न जाने कितने काम है, जो वे कर सकते है. भावुकता में विधायकी छोड़ देना बुद्धिमानी नहीं है. वे विधायक रहते हुए भी कही जा कर पढ़ा सकते है. वे सच्चे, जुझारू जनप्रतिनिधि बने. यही बेहतर है. पलायन ठीक नहीं, जो अफसर काम नहीं करते, उनकी छाती पर सवार हों, उनकी खबर ले, हालात खराब कर दें उसकी. हजारो लोगों की ताकत होती है विधायक के पास मगर कोई इस ताकत का इस्तेमाल नहीं करे सकता, तो फिर ठीक ही है. शिक्षक ही बन जाये, या कुछ भी बन जाये. लेकिन अगर कुछ करनाचाहते है, तो विधायक बने रहते हुए और अच्छे से कर सकते है. ईमानदार रह कर आदर्श प्रस्तुत करें न..भगनाक्यों. सब ऐसा करेंगे तो राजनीति में केवल अपराधी ही बचे रहेंगे. मेरे ख्याल से इन्हें डटे रहना चाहिए, और ब्यूरोक्रेसी की खाल खींच लेनी चाहिए.

    ReplyDelete
  7. राजजी, यह भारत का दुर्भाग्‍य है कि हमने राजनीति को भ्रष्‍ट और गन्‍दगी का पर्याय बताकर उससे अच्‍छे राजनीतिज्ञ छीन लिए हैं। आज भी ऐसे बहुत सारे राजनेता हैं जो बहुत ही अच्‍छा काम करते हैं लेकिन उन्‍हें रात-दिन यही सुनना पड़ता है कि राजनेता भ्रष्‍ट होते हैं। जिस देश की जैसी जनता होती है, वैसे ही राजनेता पैदा होते हैं। इसलिए दोष सम्‍पूर्ण समाज में है और हम केवल एक तन्‍त्र को दोषी बताकर सारी बुराइयों से पल्‍ला झाड़ लेते हैं। यही कारण है कि आज अच्‍छे लोग राजनीति में आने से कतराने लगे हैं। मैं यह नहीं कहती कि राजनीति स्‍वच्‍छ है लेकिन मेरा इतना ही कहना है कि जो भ्रष्‍ट है उसका नाम लेकर बोलना चाहिए, इस जुम्‍ले को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए। नहीं तो मीडिया की कृपा से राजनीति में सारे ही भ्रष्‍टाचारी लोग आ जाएंगे और ऐसे विधायक धीरे-धीरे गुम होते जाएंगे।

    ReplyDelete
  8. ऐसे व्यक्ति को इस देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बनना चाहिए तब जाकर इस देश और समाज का सही मायने में उदय होगा | ऐसे व्यक्ति हमारे देश के आज के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से बेहतर व कलयुग के भगवान स्वरुप हैं | हम जल्द ही ऐसे व्यक्ति से मिलले का प्रयास करेंगे और अगर मिल सकें तो यह हमारा सौभाग्य होगा कास ऐसी भावना श्री मनमोहन सिंह जी में तथा श्रीमती प्रतिभा पाटिल जी में आ जाती ,हे भगवान ऐसा दिन कब आएगा ? आपको भी बहुत-बहुत धन्यवाद ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने के लिए |

    ReplyDelete
  9. विरले हैं ऐसे लोग ... आज के समय में जहाँ स्वार्थ का बोलबाला है ....
    नमन है हमारा भी ...

    ReplyDelete
  10. ऐसे लोग वास्तव में आदर्श उदाहरण हैं...

    ReplyDelete
  11. पढ़कर अच्छा लगा। परिस्थितियाँ समझनी होंगी।

    ReplyDelete
  12. गिरीश पंकज जी की टिप्पणी से सहमत

    ReplyDelete
  13. मगर इतना ध्यान रखना हुजूर!
    हाथी के दाँत खामे के और
    तता दिखाने के और होते हैं!

    ReplyDelete
  14. एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
    आपकी चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं

    ReplyDelete
  15. Only such people are required in politics. Why good people give up so easily?

    It's escapism!

    I wish him to stay longer in politics for uplifting the society.

    ReplyDelete
  16. यह देश का दुर्भाग्य है कि अच्छे लोग राजनीती में नहीं टिक पाते....अच्छी जानकारी

    ReplyDelete
  17. अच्छे लोग तो हर जगह बड़ी मुश्किल से मिलते हैं फिर चाहे वो राजनीति हो या फिर कोई और क्षेत्र हो

    ReplyDelete
  18. बहुत ही आदर्श उदाहरण...काश लोग कुछ सीखें,इनसे

    ReplyDelete
  19. मेरा भी नमन उनको !! ऐसे लोगो से ही तो आशा जीवित है ...

    ReplyDelete
  20. शिक्षक का पद वाकई सबसे बड़ा पद है. पहले सम्मान था पैसा नहीं था, आज पैसा भी है सम्मान भी. लेकिन यह दुखद है कि अच्छे लोग राजनीति छोड़ रहे हैं.
    ..आपके लिंक से पढ़ा आभार.

    ReplyDelete

नमस्कार,आप सब का स्वागत हे, एक सुचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हे, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी हे तो माडरेशन चालू हे, ओर इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा,नयी पोस्ट पर कोई माडरेशन नही हे, आप का धन्यवाद टिपण्णी देने के लिये