02/04/10

उस दिन की भूल......... हे राम

बात आज से ६,७ साल पुरानी है, हम घर से कही दुर घुमने गये थे, ओर हमारे संग एक मित्र ओर उन का परिवार भी था, यानि उन की पत्नी ओर दो बच्चे, मित्र का नाम इस लिये नही लिख रहा, क्योकि यहां जर्मनी मै रहने वाले मेरे मित्र लोग इस लेख को पढ कर फ़िर उस से मजाक ना करे.
 हम दो दिन के लिये घर से दुर घुमने गये, वहां हम एक रात एक होटल मै ठहरे,  हॊटल बहुत सुंदर था ओर सस्ता भी, मोसम भी उन दिनो बहुत खुब सुरत था, हम सारा दिन घुम कर आये थक भी गये थे, लेकिन दिल फ़िर भी आस पास घुमने को कर रहा था, रात गये बीबीयां ओर बच्चे तो सोने चले गये लम्बी ड्राईविंग से ओर सारा दिन घुमने के पश्चात मुझे एक बीयर की कमी लगी, ओर होटल का बीयर वार बन्द था, मेने उस मित्र के कमरे पर हल्के से खट खटाया तो उस की बीबी ने दरवाजा खोला, तो मेने पुछा कि ??? क्या सॊ गया है? बीबी बोली अभी नही तो मेने उसे आवाज दी कि अगर बीयर पीनी है तो आ जाओ. ओर वो भी झट से तेयार हो गये,  तो दोस्त ने पूछा कि बीयर इस समय कहां से मिलेगी? तो मेने कहा यार ट्राई करते है, ओर मेरा दिल कहता है जरुर मिलेगी,
हम होटल की सीडियो से नीचे आये तो होटल की माल्किन जो एक बुढिया थी, वो सभी दरवाजो को चेक करने आई थी, तो मेने उसे नमस्ते बोला, उस ने भी नमस्ते मै जबाब दिया, तो मेने उसे कहा कि हमे दो बीयर की जरुरत है कहां मिलेगी? उस ने कहा कि होटल का बार तो बन्द हो चुका है, ओर अगर मै तुम्हे यहां इस समय बीयर दुंगी तो तुम्हारे बोलने से अन्य ग्रहाक रात को तंग होंगे, हां अगर जरुरी ही है तो क्या तुम बाहर बार मै बेठ कर बीयर पी सकते हो, उस बुढिया ने हमे दो बीयर दे दी बाहर जा कर ओर फ़िर लॊट कर ना आई, मेने ओर दोस्त ने खुद ही एक एक बीयर ओर पी, ओर पेसे अपने अपने गिलास के नीचे रखे, ओर सोने आ गये.

दुसरे दिन आंख जल्द  खुल गई, पराई जगह ओर पराये बिस्तर मै मुझे नींद कम ही आती है, ओर बच्चे भी जल्द ही ऊठ गये, हम सब ने स्नान किया ओर तेयार हो कर नाशते के लिये नीचे आ गये, नाश्ता किया ओर फ़िर घुमने निकल पडे, ओर आज शाम को ही वापिसी भी थी.
आज हमारी बीबी ने ओर दोस्त की बीबी ने बिलकुल एक जेसी साडी पहन रखी थी, ओर दोनो एक जेसी लग रही थी, हम दोपहर तक खुब घुमे, दोपहर बाद हम एक जगह खुले मै खाने के लिये रुके, वहां बाहर खुब सारी कुर्सिया ओर बेंच पडे थे, ओर सभी लोग बाहर ही बेठे थे, मेरे साथ मेरी बीबी बेठी थी, खाना आने मै थोडी देर थी, बच्चे भी अब बोर हो रहे थे, हम भी, तभी मै उठा ओर एक तरफ़ ध्यान से देखा ओर दो चार चित्र भी खींच लिये, तभी मेरी नजर एक जगह गई जहां आदमी छोटे से जहाज (गलाईडर वगेरा) को ऊडा रहा था, ओर वो आदमी ओर उस के पीछे बेठी ऒरत हम सब को हाथ हिला हिला कर वाय वाय कर रही थी, मेने बीबी कॊ यह सब दिखाने के लिये, उसे पीछे से बाहॊं मै जकडा ओर एक हाथ से उस ओर ऊंगली कर के उसे दिखाने लगा, इस पोजिशन मै मेरे गाल भी बीबी के कानो को छु रहे थे, ओर मेने बीबी की ओर देखे बिना कहा वो देखॊ, तभी दुर से बीबी की आवाज आई कहां???? ओर मेने अपने साथ वाली वला को देखा ओर उसे दुर किया, फ़िर बहुत शर्मिंदा हुआ, ओर बार बार माफ़ी मंगने लगा कि यह सब तो गलती से हुया है,लेकिन उस सीन को ना हमारी बीबी ने देखा ना ही हमारे दोस्त ने.... फ़िर कई दिनो तक मै दोस्त की बीबी से आंख ना मिला पाया, लेकिन अब हमेशा कहता हुं कि तुम अपनी अपनी साडी अलग अलग पहना,
लेकिन उस दिन सब का हंस हंस के बुरा हाल था, लेकिन हमारा हाल सब से अलग था,लेकिन मै शुक्र करता हुं कि दोस्त कि बीबी ने कही जोर दार थप्पड नही जड दिया, बाल्कि उन का कहना था यह सब हम दोनो के स्थान बदलने के कारण हुया है, अगर वो इसे गलत समझते तो मेरी इज्जत क्या रह जाती.... लेकिन आज उस भूल को याद कर के होंटॊ पर मुस्कान आ जाती है,

18 comments:

नरेश सिह राठौङ said...

जिन लोगो से आपकी दोस्ती है या थी वो आप पर पूरा विश्वास करते थे | और आपकी दोस्ती की बुनियाद भी आपसी विश्वास पर ही टिकी होती है | केवल इसी लिए आप बच गए | थोड़ी बहुत आपकी शराफ़त वाली इमेज ने आपको बचा लिया | बहुत सीख देने वाला मजेदार प्रसंग है |

Suman said...

nice

महेन्द्र मिश्र said...

सीख देने वाला मजेदार प्रसंग है...

महेन्द्र मिश्र said...

ओह दादा आप भी गजब करते हैं ... पर आगे से भूल सुधार वाह साब

Arvind Mishra said...

वाकई यह भूल ही हुयी थी भाटिया साहब -चलिए आपको बेनेफिट आफ डाउट दिए ही देते हैं हा हा

Sanjeet Tripathi said...

chaliye saheb, ab aap kahte to maan hi lete hain ki ye mahaj ek bhool hi thi
;)
;)

ललित शर्मा said...

हा हा हा
क्या हंसी भुल थी जो भुल से हो गयी ।
एक हंसी हमारे होठों पर भी खिल गयी।

हा हा हा
अब समझना पड़ेगा कि आपकी
क्या हालत हुयी होगी।:)

Babli said...

बहुत ही बढ़िया, शानदार और मज़ेदार प्रसंग लगा! बधाई!

M VERMA said...

मजेदार प्रसंग
साड़ी में उलझ गये

जी.के. अवधिया said...

ऐसी भूल जब होती है तो आदमी को स्वयं पर लज्जा आने लगती है किन्तु बाद में वह एक खूबसूरत यादगार बन कर रह जाती है।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुते रोचक प्रसंग.

रामराम.

अन्तर सोहिल said...

ऐसा लगता है कि अभी तक ग्लानि या अपराध-बोध महसूस कर रहे हो जी आप, है ना?
मेरे जैसे कुछ लोग तो जानबूझ कर ऐसा कर डालते हैं ;-)

बढिया प्रसंग था

प्रणाम स्वीकार करें

ajit gupta said...

राम ही जाने।

जितेन्द़ भगत said...

मजेदार प्रसंग पर अफसोसजनक नहीं।

संजय भास्कर said...

बहुत ही बढ़िया, शानदार और मज़ेदार प्रसंग लगा!

सुशील कुमार छौक्कर said...

होता है कभी कभी ऐसा भी।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

कभी कभी जीवन में कुछ ऎसे किस्से हो जाते हैं जिन पर बाद में सिर्फ मुस्कुराया ही जा सकता है....

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

:D