14/10/09

कही हमे जहर देने कि कोशिश तो नही यह??

आज भटकते भटकते यहां गया, ओर इस खबर को एक बार नही कई बार पढा, ओर मुझे तो यही समझ मै आया कि अब जानवरो के बाद यह परिक्षण हम पर होगा, ओर करने वाले भी..... पुरी खबर आप यहा पढे ओर बताये क्या यह उचित है

24 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आप बिल्कुल सही कह रहे हैं।
धनतेरस, दीपावली और भइया-दूज पर
आपको ढेरों शुभकामनाएँ!

संगीता पुरी said...

विवाद तो कुछ ही जगहों पर होता है .. हम तो पहले से ही जहर खा रहे हैं !!

परमजीत बाली said...

विचारणीय पोस्ट लिखी है।

समयचक्र - महेंद्र मिश्र said...

विचारणीय पोस्ट सब्ज्जियो में दालो में और मिलावटी चीजे खा रहे है उनमे भी तो जहर है . दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामना .

Udan Tashtari said...

चिन्तनीय विषय है.

Mishra Pankaj said...

अब क्या kahaa जाए ऐसे muddo पर jisake मन में जो aa रहा है wahee कर रहा है

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

Happy Diwali -- Good warning Raj bhai sahab

ab inconvenienti said...

जो लोग रोज़ सिंथेटिक दूध , मावा, घी, मिल्क पाउडर, ओक्सिटोसिन हारमोन जैसे ज़हारों के बारे में रोज़ टीवी में अख़बारों में रोज़ भयावह समाचार पढ़कर भी विरोध करने सडकों पर नहीं उतर रहे हैं, और न ही अपने बच्चों को दूध मिठाई देने से बाज़ आ रहे हैं, मज़े से सेहत के नाम पर खा पी रहे हैं .... उनसे आप कैसे उम्मीद करते हैं की वे जेनेटिक इंजीनियर्ड फसलों का विरोध करेंगे?

बकौल मुन्नाभाई, "ये डरा हुआ समाज क्या बदलाव लाएगा?"

राजीव तनेजा said...

बाहर वालों की नज़र में हम भारतीय कीड़े-मकोड़ों से बढकर कुछ नहीं हैँ

शिवम् मिश्रा said...

चिन्तनीय विषय है |


आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !

रश्मि प्रभा... said...

sahi kaha.........

कुछ दीये खरीदने हैं,
कामनाओं की वर्तिका जलानी है .....
स्नेहिल पदचिन्ह बनाने हैं
लक्ष्मी और गणेश का आह्वान करना है
उलूक ध्वनि से कण-कण को मुखरित करना है
दुआओं की आतिशबाजी ,
मीठे वचन की मिठास से
अतिथियों का स्वागत करना है
और कहना है
जीवन में उजाले - ही-उजाले हों

सतीश सक्सेना said...

दीपावली पर आपको और परिवार को शुभकामनायें !

शरद कोकास said...

यह हमारी नियति है कि हम परिक्षण के लिये उपस्थित है । लेकिन इसका विरोध तो होना ही चाहिये ।

Mithilesh dubey said...

सार्थक पोस्ट। दीपावली पर आपको शुभकामनायें .............

Arvind Mishra said...

अब विकास की इतनी भी कीमत क्या नहीं चुकाई जायेगी ?

खुशदीप सहगल said...

राज जी,
अंधेर नगरी, चौपट राजा...आज के समाज में उदारीकरण ने मुनाफे की जो पट्टी आंखों पर बांधी है...वहां ऐसी विकृतियां सौगात में मिलनी स्वाभाविक है...

दीवाली आपके और घर वालों के लिए मंगलमयी हो...

जय हिंद...

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa said...

शुरुआत हो गयी है अब आगे चावल , आलू, भिंडी वगैरह का नम्बर आने वाला है।
हमें "विषपायी" बनाने की तैयारी है।

G M Rajesh said...

happy birthday to you
because you BORN after reading some facts

thanks for encouragements

पी.सी.गोदियाल said...

जभी तो मै बोलू कि ये वैगन आजकल स्वादिष्ट क्यों नहीं हो रहे, खैर, आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये, भाटिया साहब !

जी.के. अवधिया said...

हमारा आयुर्वेद तो वैसे ही बैंगन का परहेज करने को कहता है फिर अब ये बीटी बैंगन की क्या आवश्यकता पड़ गई? और उगाना है तो भारत में ही क्यों? चिन्ता सही है आपकी।

आपको तथा आपके परिवार को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ!

योगेन्द्र मौदगिल said...

Sahi Baat.........par ise samjhe kaun..?

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

पहले तो ये बीटी बैंगन आएंगे...फिर उसके बाद पीछे पीछे नई बीमारियाँ आएंगी....फिर जाकर उनके इलाज के लिए विदेशों से दवाईयाँ आएगी...बस ऎसा ही होता रहेगा ।

आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाऎँ !!!!!!!

Babli said...

बहुत बढ़िया और सठिक लिखा है आपने! आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !

शोभना चौरे said...

राज भाई साहब
आपने बहुत अच्छी जानकारी उपलब्ध करवाई धन्यवाद |

एक नन्हा दिया अपने आप को जलाकर अमावस कि रात को प्रकाशवान करता है |
आपको और पूरे परिवार को
दीपावली मंगलमय हो |
शुभकामनाये बधाई