30/01/09

पत्रकार के सम्मान में जूते की कलाकृति

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर जूता फेंकनेवाले पत्रकार को सम्मान देने के लिए इराक़ में एक जूते की कलाकृति बनाकर लगाई गई है.... पुरा पढने के लिये यहां जाये

24 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत आभार इस लिंक के लिये.

रामराम.

योगेन्द्र मौदगिल said...

Bhatiya g,
Pranaam.
chot ko yaad dilati post hai.
jaroori bhi.
shesh fir...

योगेन्द्र मौदगिल said...

Bhatiya g,
Pranaam.
chot ko yaad dilati post hai.
jaroori bhi.
shesh fir...

महेंद्र मिश्रा said...

कही जूते का इराक़ में राष्ट्रीय स्म्रारक न बना दिया जाए शंका होती है ये सब देखकर राज जी . बहुत बढ़िया चित्रण जूते का . धन्यवाद.

hem pandey said...

वैसे तो प्रायः बी बी सी पढ़ता हूँ, लेकिन यह पोस्ट पढने से रह गयी थी. लिंक देने के लिए धन्यवाद.

Gyan Dutt Pandey said...

उसे (जूते को) राष्ट्रीय गौरव का चिन्ह भी बनादें! :)

रश्मि प्रभा said...

vaardaat kee jaankari thi,patrakaar ke kahe gaye wakyon ko padhkar achha laga,yun kahiye-sukun mila.......

सचिन मिश्रा said...

जानकारी के िलए आभार.

अशोक मधुप said...

अच्छा लेख।

Anil Pusadkar said...

जाकी रही भावना जैसी।

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

सचमुच बहुत खूब.... मजा आ गया

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

सचमुच बहुत खूब.... मजा आ गया

P.N. Subramanian said...

आश्चर्य नहीं की यह इराक का राष्ट्रीय चिन्ह बन जाए.लिंक के लिए आभार.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

वाह! यह भी खूब रही।

आदर्श राठौर said...

धन्यवाद..

Nirmla Kapila said...

itne bade joote ke samarthan me keval 400 log? khair padna dilchasp raha

डॉ .अनुराग said...

बहुत आभार इस लिंक के लिये.

नीरज गोस्वामी said...

हमारे यहाँ भी तो जूतम पैजार कम नहीं होती...संसद में जूता फैंकने वालों को क्यूँ नहीं सम्मानित किया जाता...???है कोई जवाब किसी के पास????
नीरज

Anwar Qureshi said...

भाटिया साहब प्रणाम ...माफ़ कीजियेगा बहुत दिनों बाद आया हूँ ...
लिंक के लिए शुक्रिया ...वैसे उस पत्रकार की ये हैसियत थी की वो वहां तक पहुँचा ...और जो किया वो उसके दिल की आवाज़ थी जो उसने सुना ...

Harkirat Haqeer said...

पत्रकार के सम्मान में जूते की कलाकृति....
jo bhi ho bat kuch jachi nahi...kisi galat karya ko bdhawa dena koi samman janak bat to hai nahi...?

अभिषेक ओझा said...

वाह ! आभार इस ख़बर के लिए.

shelley said...

aabhar. hamare yaha v aise sahas ki jarurat hai.

shelley said...

aabhar. hamare yaha v aise sahas ki jarurat hai.

महावीर said...

लिंक के लिए धन्याद। इस जूते को देख कर बुश क्या अपने देश के ही नेताओं पर शर्म आने लगती है। जब भी कहीं भ्रष्टाचार की बात होती है तो भारत का नाम जुड़ा होता है, दिल में दर्द होता है, जूते से कम नहीं। घूसखोरी जीवन का अंग बन गया है।