22/10/08

आज से चांद पर अपना ठेला

नमस्कार, सलाम आप सब को आप सभी को अपने धंधे की ओपनिगं पर निमंत्र्ण पत्र इस बांलाग के जरिये भेज रहा हू, कल सुबह शुभ महुरात है, मेने अपना पहला ठेला चंद्रमा पर लगाया है, वहां लगाने का बहुत लाभ है, कोई उधार नही मागतां, कमेटी वाले तंग नही करते, भाई लोग भी हफ़्ता लेने नही आते,बस असली ग्राहाक ही आते है, आईये आप को कल सारा दिन खाना फ़्रि, साथ मे चंदरमा की सेर भी फ़्रि।
कल सुबह ८,०० बजे महुरत है, आप सब बाल बच्चो समेत जरुर आये, ओर इस गरीब ठेले वाले को अपना आशीर्वाद दे
पत्ता....
जमीन ओर सुर्या के बीच वाली गली, जिला चांद पुर , डाक खाना चंदा मामा। ठेला ना० एक ( पहला ठेला) यहां आने के लिये आप को वीजे की जरुरत नही, सोच रहा हु अभी यहां जमीन सस्ती है ले लू

29 comments:

Manish said...

अरे ऐसे कैसे चले आये, मुँह उठाये … हें !!

मेरे ठेले को अपना कह गये और तो और कल भीड़ भी बुला ली! हें?

सबको खिलायेगा पिलायेगा कौन! हें

बच्चे आयेंगे खेलते कूदते उछल गये तो 20-30 फीट उपर चले जायेंगे और वापस आते आते टुन बोल गये तो!!?? ? ?? हें …
:) :) :)
तो जनाब कल आयें …

मेरे को प्लेट साफ करने वाला समझ कर रख लीजियेगा लेकिन दिहाड़ी 6 गुनी चाहिये

वो क्या है कि वहाँ के गुरुत्वाकर्षण बल में कुछ लफड़ा है

ही ही ही … कहिये तो आऊं!! और आवेदन मिले तो कहिये…

:)
उन्हें मैं रख लेता हूँ

:)

धीरू सिंह said...

agar chand par koi preshani ho to btaye.akhir mamam ka ghar hai

Ratan Singh Shekhawat said...

भाटिया जी कही चाँद पर भी किसी राज ठाकरे ने कोई सेना तो नही बना रखी धरती वाला कह कर कही पिटवा दो |

Alag saa said...

ठेले की खबर पाते ही मैनें डिस्पोजल ग्लास और प्लेट का काम शुरू कर दिया है। वहां पानी तो है नहीं। सो-------------------

योगेन्द्र मौदगिल said...

भाटिया जी
एक कनूपी म्हारी लगवा लो अपनी गेल मैं
ठाट तै बेठ किस्से बेचेंगें
ताई बी कल की ताऊ के पीच्छै पड़री सै जरमन लट्ठ लेकै ताऊ रास्ते म्हं हैगा

श्रीकांत पाराशर said...

Bhatiaji, aap chaliye, ham bhi aarahe hain. ek chhota sa akhbar nikal lenge. aap logon ki khabren upar se neeche tak bhi to pahunchani hongi.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत बढिया ! जब चंद्रयान यहाँ से निकल गया तो आप निमंत्रण भेज रहे हैं ? अब वहाँ आए कैसे ? ठीक है साब , अगला चंद्रयान आयेगा तब आयेंगे ! तब तक आप वहाँ सेट्ट्ल हो जाना और हमारा भी रुजगार चन्द्रमा पर जमवा देना ! यहाँ चोरी डकैती कर कर के परेशान हो गए हैं !:)

seema gupta said...

" wah wah sir jee thodee see jmeen hume bhee dila daina, ek chota sa parlour hee khol dainge "Uniti beauty parlour ke naam se" kasam se bhut chlega.... vo kya hai aajkul naam biktaa hai na"

Regards

Hari Joshi said...

एक प्‍लाट ताउ को दिलवा दो, उसके बाद तो ताउ सारे ब्‍लागरों को कब्‍जे करा ही देंगे।
चांद तब तक चांद है जब तक वहां आदमी न पंहुचे।

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

चिंता मत करिए ज़्यादा दिन आपका ठेला सलामत रहने वाला नही है... इंडिया ने अपना यान वहा भेज दिया है..

डॉ .अनुराग said...

ऐसा ही ठेला कभी पंगेबाज ने भी लगाया था .लगता है आपने उनसे खरीद लिया है.......चलिए कोई बात नही...ब्लोगर को कुछ discount मिलेगा ?

दीपक "तिवारी साहब" said...

मैं भी आ रहा हूँ ! ज़रा हमारे खंभे वंबे का जुगाड़ ....या जगाधरी....का ?

भूतनाथ said...

निमंत्रण के लिए आपको धन्यवाद ! वैसे हमने आपका सब इंतजाम करवा दिया है ! हम और यूनिटी डार्लिंग तो इधर आते जाते ही रहते हैं ! आपको कोई कष्ट हो तो बता दीजियेगा ! आपके मुहूर्त में हम दोनों ही आ रहे हैं ! और हाँ , यहाँ चाँद पर कभी २ तूफ़ान आ जाया करते हैं तो आपका ठेला ठीक रखियेगा ! वैसे यूनिटी डार्लिंग को पानी पूरी बहुत पसंद है तो आप जरुर तैयार रखियेगा ! अगर उसको अच्छी लगी तो उसकी उड़नतश्तरी आपके ठेले के पास ही उतरा करेगी ! यानी आपकी परमानेंट ग्राहक !

रश्मि प्रभा said...

main to zarur aaungi,chatpate khane ke saath chaand se dosti karungi,aur unke saath paying guest rahungi

अभिषेक ओझा said...

:-) main to chala !

Radhika Budhkar said...

अरे वाह अभी भारत अपना तिरंगा लहराने वाला हैं आप तो पहले ही पहुँच गए , चाँद से कहियेगा रोज़ पूर्णिमा सा खिला करे वरना धरती की धुल मिटटी में वह दीखता ही नही ,आरोही पूछती रहती हैं चंदा मामा कहाँ हैं ?उसे दीखता ही नही .

Deepak Bhanre said...

श्रीमान जी अच्छा है .

मनुज मेहता said...

sach ke rahe hain raaj sahab, thela to laga hi lijiye, peeche peeche hum bhi aate kisi ko documentary film bhi to banani hogi na.

मनुज मेहता said...

raaj ji yeh illustration bahut hi khoob banaya hai, yeh graphic bahut hi bhaya man ko pa yeh is thele par likha kya hai?

Gyandutt Pandey said...

चांद के ठेले पर अच्छा ठेला जी आपने।
थॊड़ा बिजी हूं, नहीं तो जरूर आता आपके ठेले पर! :)

रंजना said...

waah ! yah khoob rahi.

जितेन्द़ भगत said...

मैं कल ही सोच रहा था, चॉंद पर इतनी रोशनी क्‍यों है?

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

मै भी सोच रहा हूँ कि वहां चाँद के धरातल से १०० मील ऊपर एक कलारी खुलवा दूँ . अभी तो चाँद के धरातल तक तो पहुँच नही पाए है सिर्फ़ अपना खटोला १०० मील ऊपर हवा में स्थापित हो जावेगा और एलान करवा दिया कि हम चाँद पर पहुँच गए. राज जी आपकी चाँद कि सोच काबिलेतारीफ है. बहुत बढ़िया

समीर यादव said...

भाटिया जी लोन दिलवा देन तो हम भी कुछ सोचे, वैसे भी बिना पड़ोसी के आप ज्यादा दिन हरिया नहीं पाएंगे.

दीपक said...

धांसु द फ़ांसु आईडिया है!!मगर ठेले के पास एक दुसरा चांद जैसा कुछ चमक रहा है !!देखके भाटिया जी कही रांग नंबर तो डायल नही कर दिया ना !!

Birds Watching Group Ratlam (M.P.) said...

thele wale bhaiyaa chand par bhi apni jani pahchaani poshak me hai
chanrayaan ke yaatri ye dekh sakte me aa gaye honge

badhaai aapko chandrayaan mission ki
ab bhartiy upgrah diwaali yahi manaayegaa sut katati budhiyaa ke sath, yaa baithe bhaalu ke pass

सचिन मिश्रा said...

Bahut badiya.

Mrs. Asha Joglekar said...

अरे वाह आपका ठेला भी लग गया । अब तो आना ही पडेगा । पर चंदा लगता तो यहीं से सुंदर है ।

Kheteshwar Borawat said...

हिन्दी - इन्टरनेट
की तरफ से आपको सपरिवार दीपावली व नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये