18/10/08

ताऊ की चालाकी

ताऊ की चालाकी
एक समय की बात है, जब ताऊ जवान हुआ करता था,ताऊ घर पर सोया था, ओर उधर नहर वाले खेत के पास से तीन अजनबी लोग गुजर रहे थे, दोपहर का समय था, ओर आसपास भी कोई नही था,अब तीनो ने सोचा चलो खेत मे चने लगे हे, ओर आसपास भी कॊई नही, ओर हमे भूख भी लगी हे, तो चने खाये जाये, यह तीनो लोग मे से एक ब्राह्मण था, एक क्षत्रिय था, ओर एक नाई, बहुत सोच समझ के बाद तीनो ने चने उखाडे ओर वही बेठ के खाने लगे.पुरी कहानी पढने के लिये यहां दवाये

2 comments:

शोभा said...

आजकल आप यहाँ न लिख कर लिंक ही दे रहे हैं. क्या बात है?

प्रहार - महेंद्र मिश्रा said...

प्रेरक अच्छी सीख देती मजेदार कहानी के लिए राज जी आपका धन्यवाद. आनंद आ गया .