30/09/08

दादी मां.

एक बार दादी मां का अपनी बेटी के घर आना हुआ, अब दो दिन रह कर दादी मां अपने घर रोहतक जाने के लिये तेयार हुयी, बच्चो के पास समय नही था इस ९० साल की बुढिया दादी मां के लिये, ओर दादी मां दिल्ली से रोहतक के लिये चली......
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8 comments:

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणी नमोस्तुते॥


शारदीय नवरात्रारम्भ पर हार्दिक शुभकामनाएं!
(सत्यार्थमित्र)

rakhshanda said...

बहुत सुंदर राज जी, और हाँ, आपको ईद और नवरात्रि की बहुत सारी मुबारकबाद ..अपना ख्याल रखियेगा.

डॉ .अनुराग said...

हर तरफ़ चकाचक ,नए अंदाज में आप किस्से सुनाते है....दादी मां वाला भी खूब है

हिन्दुस्तानी एकेडेमी said...

आप हिन्दी की सेवा कर रहे हैं, इसके लिए साधुवाद। हिन्दुस्तानी एकेडेमी से जुड़कर हिन्दी के उन्नयन में अपना सक्रिय सहयोग करें।

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सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणी नमोस्तुते॥


शारदीय नवरात्रारम्भ पर हार्दिक शुभकामनाएं!
(हिन्दुस्तानी एकेडेमी)
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अशोक पाण्डेय said...

अरे राज भाटिया भैया, चटका तो लगाया लेकिन ब्‍लॉग खुल नहीं रहा है। लिखता है कि यह ब्लॉग मात्र आमंत्रित पाठकों के लिए है। मेरा आमंत्रण पत्रवा कहां गया :)

Alag saa said...

ओ भाटिया साब, सानूं पुल गये। दादी मां नुं असी वी देख लैंदे।

Udan Tashtari said...

ईद मुबारक!!
नवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनाऐं.

राज भाटिय़ा said...

अशोक पाण्डेय जी माफ़ी चाहता हू, मेने थोडी देर के लिये इसे बन्द कर दिया था, इस का रुप रंग हमारे चाहने वालो को थोडा तंग कर रहा था, इस लिये इसे बदल रहा था, अब आईये आप कॊ केसा लगा यह भी बताये...
ओर आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद, ओर आप सभी कॊ ईद की मुबारकवाद ओर नव रात्रो की बधाई
आप सभी का धन्यवाद