26/09/08

आईये आज आप कॊ प्लेन मे घुमाये

आईये आज आप को केरला के अति सुन्दर प्लेन की सेर करवाये वो भी मुफ़्त मे साथ मे मुफ़त खाना भी, ओर अगर आप ने चुटकले भि पढने हो तो यहां जा कर चुटकले भी पढ सकते हे, लेकिन ठरिये पहले हमारे साथ जहाज मे तो बेठिये, फ़िर खाना खाये..... तो चले रनवे की तरफ़.... थोडा नीचे की तरफ़ चले।

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21 comments:

रंजन राजन said...

ये दिल मांगे मोर। थोड़ा और चलेगा....

सतीश पंचम said...

लेकिन एक कमी खल रही है.....एअर होस्टेस की जगह एअर होस्टसा दिख रहे हैं :)
अच्छी पोस्ट।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत बढ़िया है यह तो :)

Alag saa said...

खाते-खाते पता ही नहीं चला, कब उड़ा और कब उतरा।

पंचमजी के कान में "मुफ़्त में होस्टसा ही मिलेंगे, अब एअर लाईन वालों के कपडे थोडे ही बिकवाने हैं।

Paliakara said...

अच्छा लगा पर कुछ आगे भी बताइए ना.

seema gupta said...

" arey, ye kaun sa plan or khan ke journey hai jhan, bnana ke leaf pr khana prosa ja rha hai, hai to bda interesting nazara, but hai khan ka???"

Regards

ताऊ रामपुरिया said...

भाटिया साहब ये तो सिर्फ़ और सिर्फ़ कमाल है !
विश्वाश नही होता इस थीम का ! शानदार
आइडिया है ! धन्यवाद !

भूतनाथ said...

हम भी इसी प्लेन में बैठ कर आपसे मिलने आ रहे हैं ! ?

दीपक "तिवारी साहब" said...

क्या बात है जी ? बहुत बढिया प्लेन है !

दीपक said...

बहुत खुब ! ट्रेडीशनल फ़ुड ! केरला के प्लेन मे केले के पत्ते मे खाना !!

rakhshanda said...

वाह राज जी ...मज़ा आगया, सच..आपने दिल खुश कर दिया...थोड़ा और तस्वीरें देते तो और मज़ा आता..लेकिन फिर भी बहुत मजेदार

रश्मि प्रभा said...

hawaa ke saath is plain ka mazaaaaaaaaaaa.......duniya ki sair kar len muft me,
wo bhi hanste-hansaate

शोभा said...

राज जी,
बहुत -बहुत आभार. मैं तो अभी तक प्लेन मैं नहीं बैठी थी. आज इतने बढ़िया प्लेन की यात्रा कर ली. सुंदर चित्र और सुंदर प्रस्तुति.सस्नेह.

अशोक पाण्डेय said...

प्‍लेन में केले के पत्‍ते पर खाना.. वाह मुंह में पानी आ गया। अब चलकर चुटकुला भी सुन आते हैं :)

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

आपके पिताजी श्री ओम प्रकाश भाटिया जी की तसवीर को नमन -
ये बडी रोचक पोस्ट लगी राज भाई साहब -
अब और क्या करेँगेँ ये प्लेन सर्वीसवाले बँदे ?
गुजराती गरबा भी करवायेँगे क्या ? :)
लिखते रहीये जी ~~~
- स्नेह,
- लावण्या

राज भाटिय़ा said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद, लावण्यम् जी आप का बहुत बहुत धन्यवाद,अभी बात चल रही हे शायद गुजराती गरबा, ओर पंजाबी भगडा भी हॊ, फ़िर तो कॊई केम शू बोले गा तो कोई पजाबी मे किदा*

लवली said...

aur sab pata nahi khana meri pasand ka hai dakchhin bhartiye..waah kya hawi jahaj hai :-)

Anil Pusadkar said...

भाटिया जी केरल घूमने की बहुत ईच्छा थी आपने पुरी कर दी। आणंद आ गया

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

वाह भाटिया जी, केले के पत्ते पर खाना और हवाई जहाज़ जैसा वातावरण. मज़ा आ गया. कहाँ है यह ढाबा?

Hari Joshi said...

भाई राज जी,
एक इडली मेरे लिए भी बुक करा दीजिएगा। और हां। एक उतपम भी। केले के पत्‍ते पर देखकर मुंह में पानी आ गया। देशज बोलें तो लार टपक गई।
अरे हां। अपने देश पर कुछ नए गीत भी परोस दीजिए।

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

plain ke andar ka joradar najara dikhane ke liye dhanyawad . itana kahunga hostej ki jagah veetar dikha raha hai . jameen par khade plen ki foto lagati hai . jameeni foto lag rahi hai . asaman ke khane ke sath pyari pyari jo sath hoti hai . maja aa gaya .ha ha bas apun to esai