11/08/08

अर्ज किया हे ??

आप की नजर दो सडे गले शेर पेश करता हु, अच्छे लगे तो पढिये, वरना पतली गली से निकल ले।अजी जाते जाते हमारा आदाबा तो कबुल फ़रमाईये...

तो अर्ज किया हे...
रोक दो मेरे जनाजे को, के मेरे मे जान आ गई हे,
पीछे मुड के देखो जरा, इक दारु की दुकान आ गई हे।

बोतल छुपा दो कफ़न मे मेरे, कब्र मे पिया करुगा,
जब मांगे का हिसाब खुद तो,पेग बना के दिया करुगा।


हम तुम से नजरे केसे मिलाये जानम,
हमारी बायी आंख कानी, आप की दायी आंख कानी.

12 comments:

Anil Pusadkar said...

dayen aur bayen ka lafda to bahut khatarnaak hai,inko tune karwa lijiye bhatia saab warna dekha nahi inke lafde me sarkaar girte-girte bachi thi aur sare neta nange ho gaye the.aap thoda sawdhaan rehna left aur right ke lafde se. Mazaa aa gaya saab dayin aur bayin wah

नीरज गोस्वामी said...

राज साहेब
एक अलग मिजाज का शेर और जोड़ लीजिये अपने इस नायब खजाने में:
"मैं मर गया जिसके लिए, ये हाल है उसका
ईंटे चुरा के ले गया मेरे मजार से"
नीरज

जितेन्द़ भगत said...

क्‍या शेर था , वाह-वाह मजा-सा आ गया।

अनुराग said...

vah vah.....

Advocate Rashmi saurana said...

हा हा हा.............वाह वाह!!!!!!

Nitish Raj said...

वाह वाह भाटिया जी...वाह

रश्मि प्रभा said...

botal chhupa do kafan me........
maza aa gaya, ghisi piti shaayri dil pe chha gai

शोभा said...

हा हा हा बहुत बढ़िया

Udan Tashtari said...

हा हा!! बहुत मजेदार!!

Anwar Qureshi said...

khushbooo.. aa rahi hai ..aur hichki bhi ... aaj aap ne kuch zaada hi pila di bhaatiiiiyaaaa saahab ... main to surur mein hun..hickiya hickiya ...

P. C. Rampuria said...

बिल्कुल खांटी है भाटियाजी ! चखते ही
तबियत मस्त हो गई ! बस ऐसा ही शुद्ध
देशी माल चलेगा अपने को तो ! बिलायती
नही चलता !
धन्यवाद

बालकिशन said...

हा हा हा