24/07/08

कुछ ओर शेर सुनाता हु मे...

अजी गोर फ़र्माये.. अर्ज किया हे...
रात होगी तो चांद भी दिखाई देगा,खावो मे तुम्हे वो चेहरा भी दिखाई देगा,
ये मुहब्बत हे जरा सोच के करना,क्योकि एक आंसु भी गिरा तो सुनाई देगा.

चेहरे पे बनावट का गुस्सा, आंखो मे झलकता प्यार भी हे
इस शोंकयऎ अदा को कया कहिये, इकरार भी हे इनकार भी हे.

8 comments:

vipinkizindagi said...

अच्छे शेर है

शोभा said...

बहुत बढ़िया।

अनुराग said...

रात होगी तो चांद भी दिखाई देगा,खावो मे तुम्हे वो चेहरा भी दिखाई देगा,
ये मुहब्बत हे जरा सोच के करना,क्योकि एक आंसु भी गिरा तो सुनाई देगा.


vah vah......

P. C. Rampuria said...

भाटिया जी चाल्हे रौप दिए थमनै तो !
ओहो हो !..... प्रीतम प्यारे की याद दिलादी !

बाबा पलटूदास जी के भजन की दो लाइन--

" रैन दिवस बेहोस पिया के रंग में राती !
तन की सुधि है नाही पिया संग बोलत जाती !!

आपका अनंत अनंत धन्यवाद !

दीपक said...

पुरा गौर फ़र्मा रहे है जनाब इर्शाद इर्शाद !!

advocate rashmi saurana said...

vah vah bhut khub.

Udan Tashtari said...

वाह!! वाह!! चालू रहिये. (मुन्नू को भेजता हूँ :))

P. C. Rampuria said...

गुरुदेव और चाहे जो सजा देलो पर मुन्नू को आप ही संभालो !
म्हारा बस का रोग ना सै यो मुन्नू !