27/07/08

जरुरी काम की बाते

पैसा सारी बुराइयों की जड़ है...... और इंसान को जड़ों की जरूरत हमेशा बनी रहती है।
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शादी विवेक पर कल्पना की विजय है।
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नौकरी दो चीजों के लिए की जाती है - तनख्वाह और छुट्टियां
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मृत्यु आनुवांशिक बीमारी है।
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मित्र से उधार लेने के पहले सोचिये कि आपको किसकी जरूरत ज्यादा है - मित्र की या धन की ?
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पुरुषों के लिए जो बात निश्चित नहीं होती, महिलाएं उस पर तटस्थ रहती हैं।
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महिलाओं के दिल में एक खास कोना होता है, जिसे वे कभी किसी के साथ नहीं बांटतीं।
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महिलाओं के लिए राय : पुरुष के साथ खुश रहने के लिए उसे प्यार चाहे कम करें, समझने की कोशिश ज्यादा करें।
पुरुषों के लिए राय : महिला के साथ खुश रहने के लिए उसे बेशुमार प्यार करें और समझने की कोशिश कतई न करें।

19 comments:

  1. sahi salaah magar mera vivek abhi tak kalpana se hara nahi hai.mazaa aa gaya.ab to padhe bina sab gadbad lagne laga hai.dhanyawad

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  2. महिलाओं के लिए राय : पुरुष के साथ खुश रहने के लिए उसे प्यार चाहे कम करें, समझने की कोशिश ज्यादा करें।
    पुरुषों के लिए राय : महिला के साथ खुश रहने के लिए उसे बेशुमार प्यार करें और समझने की कोशिश कतई न करें।

    सही बात कही है जी. अमल करना जरूरी है.:)

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  3. बहुत बढ़िया बातें बताई हैं। आभार

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  4. भई वाह!

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  5. भई वाह राज भाई मज़ा गया ग्यानवर्धन भी हुआ

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  6. राज भाटिया जी मने आप का ब्लॉग पढ़ा बहुत ही बढ़िया बाते आप ने इस मैं लिखी हैं जिन्हें हमे अपनी जिंदगी मैं जरुर अपनाना चाहिए चाहे वो " जरुरी काम की बाते " हो या " चिंतन परिश्रम " दोनों ही लेख बहुत उम्दा हैं जो मन को भा जाते हैं । मैंने सिर्फ़ दो ही लेख पढ़े हैं इस लिए मैं इन्ही के बारे मैं आप को अपनी प्रतिक्रिया दे रहा हु । शुभम .........

    ------------शुक्रिया -------------

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  7. Raj ji, kha to aap bilkul sahi rhe hai. aabhar achhi baaton ko batane ke liye.

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  8. bahut sahi . achcha khasa anubhav is post ke sath apne ham sab ko baat diya hai . dhanyawaad.

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  9. सभी काम की बातें - एक से बढ़ कर एक।

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  10. भाटिया साहब !
    आपके उपदेश मैं अपने दिल में "भाटिया जी की गीता" के नाम से स्टोर कर रहा हूँ ! इन उपदेशों की आज वाकई जरुरत है ! धन्यवाद !

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  11. सचमुच ये बातें बहुत काम की हैं। आभार।

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  12. बहुत सही बातें बताई।आभार।

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  13. क्या बात है, एक-एक शब्द सच्चा है. आजमाया हुआ है.

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  14. पैसा खाने मे नमक की तरह है ज्यादा है तब भी मुश्कील और कम है तब भी मुश्कील !!

    मजेदार पंक्तीया सादर अभार

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  15. सही लिखा,

    काम की बातें उपयोगी लगी :)

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  16. धन्यवाद आप सब के पाधरने का

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