10/05/08

मॆ ओर मेरी प्यारी मोसी...?

नमस्कार,सलाम. यह किस्सा बहुत पुराना हे, इतना याद रखना तो बहुत मुस्किल होता हे, लेकिन मोसी या कोई भी कभी कभी इस किस्से को याद दिला देते हे, इस लिये मुझे भी यह याद रह गया.

बात बहुत पुरानी हे, मे कितना बडा था,पता नही लेकिन साईकिल चलानी आ गई थी, हम लोग उन दिनो मे दिल्ली मे रहते थे,गर्मियो की छुट्टियो मे गावं मे दादा दादी से मिलने गये थे,हमारे गांव से थोडी ही दुर हमारी मोसी का गांव था, मोसी मां से बडी हे,हमारे गांव से मोसी के गांव तक हम लोग नहर के किनारे किनारे जाते थे, वह किनारा काफ़ी चोडा था, लेकिन वहां पेदल या साईकिल ही जा सकती थी, अब हमे काफ़ी दिन हो गये थे गांव मे आये तो एक दिन मां ने कहा बेटा कल तुम्हारे चाचा (हमारे गांव मे बाप से छोटे कॊ चाचा ओर बडे को ताया बोलते हे ज्यादा बुजुर्ग को दादा जी बोलते हे )किसी गांव मे जा रहे हे, तु इन के साथ चले जाना, यह तुम्हे पुल पर उतार देगे, वहां से मोसी के गांव चले जाना, ओर शाम को मोसी को साथ मे ले आना.



दुसरे दिन मुझे सुबह सुबह जगा दिया,ओर हाथ मुहं धो कर मे उस आदमी के साथ चला गया, मोसी के घर सुबह सुबह पहुच गया, मोसी ने नाशता वगेरा करवाया, ओर फ़िर मेने सारी बात मोसी को बताई, जो उन्हे पहले से ही मलुम थी, ओर विचार बना की शाम को मोसी ओर उन की छोटी बेटी मेरे साथ साईकिल पर जाये गे, मेरा साईकिल टेस्ट मोसी ने खुद लिया, ओर फ़िर हम सब बच्चे घर मे खेलने लगे, ओर दोपहर को खेतो पर भी गये दोपहर का खाना खा कर,शाम को हमारी तेयारी शुरु हुई, हमारी मोसेरी बहिन जो उस समय शायद ४,५ साल की थी उसे आगे बिठाना था, ओर मोसी कॊ साईकिल के पीछे, फ़िर हिदायत दी गई की ज्यादा तेज नही चलानी, यह देहात हे किसी से पंगा नही लेना, किसी से बात नही करनी बगेरा बगेरा...ओर पुल पर जा कर ही साईकिल यात्रा शुरु हो गी,हमारी मोसी के चार लड्किया दो लडके हे, यह सभी हमे एक मिल दुर पुल तक छोडने आये,साथ मे मोसी का नोकर भी, फ़िर उन के बेटे ने साईकिल की हवा बगेरा चेक की, ओर साईकिल को अच्छी तरह से देखा फ़िर हमारे हवाले की, ओर अब बिदाई की वेला भी आ पहुची सभी लड्किया ऎसे रो रही थी जेसे मोसी .... जा रही थी.



अब हम ने पहले छोटी बहिन को साईकिल पर आगे बिठाया, फ़िर थोडा चल कर ओर अपनी छोटी सी टांग घुमा कर साईकिल पर चढ गये, फ़िर हमारी मोसी भी पीछे बेठ गई, सभी घर वाले पिछे से हाथ हिला हिला कर हमे विदा कर रहे थे,अब बहिन ओर मोसी ने भी हाथ हिलाया तो हम ने भी कोशिश की तभी सारे जमीन पर गिर गये ओर साईकिल हमारे उपर,ओर हम चढ गये वाय वाय करने वालो पर, शुकर किसी को चोट नही आई, फ़िर से सभी यात्री हमारी साईकिल पर सवार हो गये ओर चल पडे अपने गांव की ओर नहर के किनारे किनारे दोनो ओर बहुत से पॆड लगे थे, फ़िर दुर तक खेत ही खेत, ओर हवा भी सामने से आ रही थी, जब हम बात करे तो मोसी को समझ आ जाये लेकिन्जब मोसी कुछ कहे तो उस सारे शोर(पेडो का, पानी का,ओर हवा का शोर) हमे मोसी की बात समझ ना आये जब पुछने के लिये थोडा मुहं पीछे करे तो साईकिल का बेलेंस बिगड जाये, तो मोसी ने कहा तुम दोद्नो भाई बहिन बात करो ओर साईकिल ठीक चलाओ.

अब हम दोनो भाई बहिन अपिस मे बाते करते कभी शरारत करते ओर पहुच गये अपने गांव के पुल पर,वेसे तो हमेशा हम पुल पर ही उतर जाते हे,लेकिन उस दिन पता नही क्या सोच के हम ने साईकिल धीरे से पुल से मोड कर सीधी सडक पर डाल दी ओर उस उतराई मे बहुत मजा आया ओर हम करीब एक किमी तक साईकिल बिना चलाये पहुच गये,ओर आग बेठी बहिन भी बहित खुश हुई ओर खुब तालिया बजा रही थी, अब हम गांव के पास गली मे पहुच गये ओर जहां उतरना जरुरी था, मेने मोसी से काहा मोसी उतरो ,फ़िर थोडी देर बाद मे भी उतर गया, फ़िर बहिन को उतारा, जब पीछे मुड कर देखा तो मोसी गायब.

यह सब एक दम से क्या हो गया, अरे मोसी कहा गई, कुछ समझ मे नही आ रहा था, ओर बहिन भी अब रोने लगी थी, रोने वाला तो मे भी था, लेकिन मुझे समझ नही आ रहा था, मोसी गई कहा, कही नहर मे तो नही कुद गई,या गिर गई, तभी मेरी नजर साइकिल के पीछे पडी तो देखा जिस स्थान पर मोसी बेठी थी ( उसे केरियर या कुछ ऎसा ही कहते हे उस पर समान बगेर भी रखते हे) बो तो पुछ की तरह से पीछे लटक रहा हे ओर सडक पर घिसट रहा हे, फ़िर सारा मामाला समझ मे आ गया,



अब इस बहिन का कया करु,अगर इसे घर छोडा तो मोसी के कारण मां मारे गे,इसे साथ ले गया तो सईकिल तेज नही चला पाउगा, फ़िर बहिन को बही बिठाया ओर उसे डराया अगर यहा से हिलि भी तो तुझे इस नहर मे फ़ेक दु गा, चुप चाप यहा बेठना वरना बहुत पिटाई करुगा, फ़िर वापिस जाने के लिये मुडा ही था कि एक चाचा जी हमारी मोसी को ले आये, मोसी के चोटे लगी थी, ओर शायाद कपडे भी फ़ाट गये थे, फ़िर सब घर आ गये, तो मेने मोसी से डरते डरते पुछा आप ने मुझे आवाज क्यो न्ही दि जब गिरी , तो मोसी बोली गिरते ही मुझे कुछ सुझा नही इतनी देर मे तुम काफ़ी दुर निकल गये, क्या तुम्हे भी पता नही लगा, तो मेने कहा हबा सामने से आ रही थी तो मेने सोचा यह झटका हवा के कारण हो गा, फ़िर कभी भी मोसी हमारी साइकिल पर नही बेठी.

12 comments:

DR.ANURAG ARYA said...

आपका किस्सा सुन कर मुझे बचपन याद आ गया जब हमारे पिता जी मेरे छोटे भाई को अपने साथ बाजार ले जाने वाले थे ओर जल्दी मे स्कूटर स्टार्ट करके ले गए ,१०मिनुते बाद घब राये हुए वापस आए ओर मम्मी से बोले "अनुज कही गिर गया " ,हमलोग खूब हँसे थे .

Anonymous said...

मोसी मौसी

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

हाहाहा ये किस्सा भी खूब था.. ये पढ़कर तो हमे भी एक किस्सा याद आ गया.. बचपन में बड़े भाई की साइकल अक्सर ही मिला करती थी.. एक दिन बड़े भाई साहब की साइकल लेकर दुकान पर दूध लेने गया.. और वापस पैदल आ गया.. सब परेशन की साइकल कहा गयी.. फिर याद आया की साइकल तो डेयरी पर छोड़ आया हू..

mamta said...

हा-हा-हा- !

बहुत ही मजेदार किस्सा।

Harminder singh said...

Kissa achha aur manoranjak bhi. Mera bhai apke blog ko chav se
padta hai. By Harminder singh

mehek said...

bahut hi mazedar:):)bachpan ke din suhane

PD said...

:)

राज भाटिय़ा said...

वाह अनुराग जी , ओर कुश जी आप की टिपण्णी पढ कर भी बहुत हंसी आई, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद

अभिषेक ओझा said...

majedaar !

Krishan Ram said...

हा हा हा पता हि नही चला

Krishan Ram said...

मुझे ये कहानी अच्छी लगी और मे लेखक को धन्यवाद देता हुँ

Hindi Choti said...


Hindi sexy Kahaniya - हिन्दी सेक्सी कहानीयां

Chudai Kahaniya - चुदाई कहानियां

Hindi hot kahaniya - हिन्दी गरम कहानियां

Mast Kahaniya - मस्त कहानियाँ

Hindi Sex story - हिन्दी सेक्स कहानीयां



Nude Lady's Hot Photo, Nude Boobs And Open Pussy

Sexy Actress, Model (Bollywood, Hollywood)



chudai ki hindi kahani

welcome to chudai kahani me - आग लगाने वाली चुदाई

Visit best sexy hindi story - मजेदार सेक्सी कहानियां

Hindi sex kahani dekhiye eiha – आंटी की चुदाई कहानियां

Sexy kahani ke world me apka soyagat hai