15/04/08

चिंतन जैसी दृष्टि

आज का विचार

जेसा हम देखते हे,वेसा ही सोचते भी हे, कई बार जो दिखाई देता हे वो सच नही होता,ओर क्रोध मे हम उसे ही सच साबित करना चाहते हे . आज का विचार



तुलसी दास जी रामायण लिखते ओर साथ मे भगत जनो ओर अपने शिष्या को सुनाते भी,हनुमान जी उन्हे गुप्त रह कर सुनते, एक बार तुलसी दास जी ने एक प्रंसग मे लिखा की हनुमान जी जब आशोका वाटिका मे पहुचे तो उन्होने वहां सफ़ेद फ़ुल देखे, इतना सुनाना था की हनुमान जी बोले अरे यह गलत हे मेने कोई सफ़ेद फ़ुल वहा नही देखे, तुलसीदास जी बोले अब लिख दिया तो तुम ने देखे हे, तो झगडा कयो करते हो कया बात हे जब लाल की जगह सफ़ेद लिख दिया तो,लेकिन हनुमान जी अपनी बात पर अड गये तो ,बात जब राम जी तक पहुची तो भगवान राम ने कहा हे हनुमान फ़ुल तो सफ़ेद ही थे, लेकिन गुस्से के कारण तुम्हारी आखें लाल थी इस लिये तुम्हे फ़ुल लाल नजर आये,ओर हनुमान जी भगवान की वाणी सुन कर समझ गये ओर चुप हो गये,
इस विचार का अर्थ यही हे दुनिया को हम जिस नजर से देखे गे दुनिया हमे वेसी ही दिखेगी.अगर नफ़रत से देखे गे तो गन्दीं दिखाई दे गी,दुखी मन से देखो के तो दुखी ही दिखाई देगी.सुखी मन से देखो के तो हर तरफ़ सुख ही सुख नजर आये गा.

3 comments:

mehek said...

bahut khubsurat katha hai,sahi jaisi soch hame wo hi dekhai deta hai.always be positive ,happy:)

कुन्नू सिंह said...

एक दम सही कहा। जैसा सोचते हैं करतें हैं वैसा ही हमारे साथ होता है।

बहुत अच्छी कहानी है।

राज भाटिय़ा said...

महक जी, ओर कुन्नु भाई आप दोनो का धन्यवाद