20/04/08

चिंतन श्रद्धा न की दिखावा

चिंतन यानि विचारो का मंथन,हम सभी मन्दिर मस्जिद जिसे भी मानते हे, उस ईश्वर कॊ अपने अपने ढग से पुजते हे,मन्दिरो मे मस्जिदो मे ओर गुरु दुवारो मे खुब रोनक होती हे, कही हम श्रद्धा के रुप मे दिखाबा तो नही करते अन्जाने मे ?....

एक साधु के पास एक नया शिष्या आया, ओर साधु बाबा रोजाना उसे अच्छी बाते बताते, लेकिन हर बार कहते देखो तुम श्रद्धा से राम राम जपओ राम हर सकंट से तुमहे उवहारे गे,एक दिन गुरु ओर चेला गगां पार करने लगे,चेला राम राम जपता हुया किसी तरह से बीच मे पहुच गया, जब डुबने लगा तो हाथ पावं मार कर वापिस किनारे आ गया, ओर गुरु से बोला आप ने तो कह था राम का नाम लेने से आदमी को भगवान राम आप बचाते हे, मे तो हजार बार राम राम जपता रहा, फ़िर अपने आप हाथ पेर मार कर बचा हु, राम ने तो नही बचाया ?

गुर ने कहा तुमने अगर श्रद्धा से एक बार भी राम का नाम लिय होता तो जरुर बचते,लेकिन तुमने तो दिखाबे के रुप मे भगवान का जप किया.अगर तुम भगवान का नाम मन से लेते तो तुम्हे डुबने का डर ही नही होता, तुम्हे सिर्फ़ भगवान ही नजर आते,
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मेरे ब्लोग पर आप अच्छी बाते,धर्मिक बाते पाते हे, इस कारण आप मुझे कोई साधु सरुप मत समझे, मे भी एक साधारण व्याक्ति हुं, बिलकुल आप सब जेसा, हा इन बातो को मे जीवन मे उतार्ने की कोशिश भी करता हु, गल्तिया भी करता हु, ओर यह सब बाते किताबो से इधर उधर से मिलती हे ओर जो मुझे अच्छी लगती हे आप से बाटं लेता हु.
धन्यवाद

6 comments:

अल्पना वर्मा said...

bahut sahi likha hai.
agar din mein ek baar bhi apne dil se ishwar ko yaad kar liya jaaye to mandir mein jaye bin abhi ishwar ki kripa rahegi.
achchey vicharon ko share karne ke liye dhnywaad.

mehek said...

bahut sahi baat,sau bar mukh se bhagwan ka naam japne se achha,ek baar hi dil se aawaz do.bahut hi achhi kahani hai.

DR.ANURAG ARYA said...

ham sabhi sadharan insan hai raj ji ,par kuch bate bhoolte ja rahe hai..isliye unhe ajkal ki bhagdaud bhari zindgi me remind karne ke liye...aapke blog pe roj aana meri to adat me shumar hai...
bhartandu harishchand jio ne kabhi ek lekh me kaha tha ki agar mai sarlta aor imandari se apna jeevan yapan karu aor kabhi mandir bhi na jayu to shayad vo bhi ek tarah ki puja hai....

Udan Tashtari said...

बिना आपको साधु टाईप या रामदेव टाईप मानते हुए साधुवाद तो दे ही सकते हैं इन सब ज्ञानवर्धक बातों के लिये...बहाये रहिये ज्ञान गंगा या पसंद हो तो यूँ कहें जलाये रहिये ज्ञान बीड़ी/// युनुस भाई के शब्दों में. :)

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव said...

प्रेरक कथा।

राज भाटिय़ा said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद, अनुराग जी ओर समीर जी आप का कहना सर माथे पर.