04/04/08

सुनिये एक कब्बाली,

आज घुमते घुमते कुछ ऎसा हाथ लगा कि मे झुमने लगा, फ़िर खुब मस्ती मे झुमा, तो आप भी मजा लिजिये इस खुबसुरत आवाज के मलिक के मुख से एक खुब सुरत कब्बाली.. नुसुरत फ़तेह अली खान ओर साथियो की आवाज मे..
ये जो हल्का हल्का सुरुर हे,ये जो हल्का हल्का सुरुर हे, ये तेरी आंखो का कसूर हे

3 comments:

मीत said...

वाह ! मस्त कर दिया भाई सुबह सुबह. बहुत सुंदर. शुक्रिया.

बोधिसत्व said...

bahut aanand dayak hai aap ka blog...aap ki jay ho

राज भाटिय़ा said...

मीत जी ओर बोधिसत्व जी आप सब का धन्यवाद