01/04/08

चिंतन एकता

आज का विचार, आज कल जहा भी देखो पुरे भारत मे कुछ ना कुछ गड्बड हर तरफ़ हो रही हे,कभी मुंबई मे तो कभी असम मे तो कभी कशमीर ओर कभी पंजाब मे दंगे फ़साद,भाषा पर झगडा, नदियो पर, हर कोई अपना राज्या अपना हक मागंता हे, सम्पुरण भारत की किसी को चिन्ता नही, तो आज का चिन्तन देश की एकता पर...
एकता
एक बुढा आदमी जब मरने लगा, तो उसे अपने बच्चो के बारे बहुत फ़िक्र हुई,क्योकि, उस के पास पेसो की कोई कमी नही थी,लेकिन उस के चारो लडके आपस मे खुब लडते थे, ओर उस आदमी को यही फ़िक्र थी की उस के बाद यह लडके अपनी जिन्दगी बरवाद कर ले गे, तभी उस आदमी के दिमाग मे एक विचार आया, ओर उस ने अपने चारो लडकॊ को अपने पास बुलाया ओर अपने पास बिठाया, फ़िर उस आदमी ने एक एक लकडी चारो लडको को दी, ओर कहा देखे कोन इसे तोडता हे सभी लडकॊ ने उस लकडी को घुटने पर रख कर झट से तोड दिया, उस आदमी ने अपने लडको को शावाश दी, फ़िर चार लकडिया ईक्कटी बाधं कर उन्हे दी ओर कहा अब इसे बारी बारी से तोडो, लेकिन तमाम कोशिशो के बाद भी कोई लडका उसे तोड नही पाया,तब उस आदमी ने अपने बच्चो से कहा, देखो जब सब लकडिया अकेली थी तो तुम सब ने झट से उन्हे तोड दिया, क्योकि वो कमजोर थी,जब सब आपस मे मिल गई तो उन मे एकता होगई, एकता की ताकत आ गई इस लिये तुम उसे तोड नही पाये, इसी प्रकार यादि तुम लडते रहे तो कोई भी मेरे बाद तुम्हे मार ओर लुट सकता हे लेकिन जब तुम चारो मिलकर रहो गे तो कोई भी तुम्हारी ओर आखं भी नही उठा सकता,
तो मेरे देश के लोगो हमे भी इन नेताओ,गुण्डो,ओर स्बार्थी लोगो के कहने पर आ कर लडना नही, बल्कि एकता मे रह कर इन्हे सीधा करना ओर देश कॊ बचाना हे
जय हिन्द

4 comments:

दीपक भारतदीप said...

देश की हालत पर आपकी बेबाक राय
दीपक भारतदीप

दिनेशराय द्विवेदी said...

यह तो तब था जब एक ही परिवार के चार बेटे पिता के साथ रहते थे। आज कितने परिवारों में जवान बेटे पिता के साथ रहते हैं। अब तो हालत यह है कि बेटे नौकरी पर और मां-बाप अकेले जीवन गुजार रहे हैं। यह सबक जानते हुए भी सब अनदेखा कर रहे हैं। आप रोज के समाचार देख ही रहे होंगे।

Dr. Chandra Kumar Jain said...

राज साहब , भारत की एकता के बल को
संबल देते रहिएगा इसी तरह.
आपका चिंतन अक्सर पढ़ता हूँ.
आप जहाँ हैं अपने देश को पूरी शिद्दत से जी रहे हैं .
यह सचमुच बड़ी बात है.
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अनुरोध ..... राज साहब पहले मेरी एक अन्या टिप्पणी
दरअसल काकेश जी पर है. ग़लती से यहाँ पेस्ट हो गई.
कृपया उसे निरस्त कर दीजिएगा .
आपका
डा.चंद्रकुमार जैन

राज भाटिय़ा said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद होसला बढाने का.