06/03/08

वे कहते हैं कि यह विशुद्ध आस्था है, कोई अंधविश्वास नहीं

भारत मे जनसख्या के साथ साथ देवताओ की भी सख्यां बढ रही हे,ओर हम पढ लिख विशुद्ध आस्था रखते है, कोई अंधविश्वास नंही,

लोग तो बाते करते ही हे,लोगो की बात यहां पढे,

2 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीकत लेकिन,
दिल को खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है।

राज भाटिय़ा said...

दिनेश जी धन्यवाद टिपण्णी देने के लिये.