03/03/08

तुफ़ान मे घिरा प्लेन शेष

नम्स्कार, शनिवार १,३,०८ को जर्मनी मे ऎमा ( emma ) नाम क तुफ़ान आया, तुफ़ान की सपीड १२० किमी से २२० कि मी की थी, इस तुफ़ान ने अरबो युरो का नुक्सान किया, ओर बहुत ही तबाही भी मचाई, जर्मन मे कई स्थानो मे घरो की छते ही उड गई, जगलो मे काफ़ी मात्रा मे पेड भी गिर गये, ओर हेमबर्ग मे एक लुफ़्थन्सा का प्लेन दुर्घटनाग्र्स्त होते होते बचा, इस मे १३१ यात्री थे,पहली बार उतारते वकत प्लेन हवा मे पतंग की तरह से झुल रहा था,ओर एक पर ( wing ) भी क्षतिग्रशत हो गया था, लेकिन प्यलेट की सूझबूझ से एक बडी दुर्घटना होते होते बची,अब इस पर छान्बीन हो रही हे की प्लेन को इस पटरी पर उतरने की इजाजत किसने दी... जिस के बारे थोडी देर मे पता चल जाये गा, यह अचम्भा पहली बार नही हुया, एक बार पहले भी ऎसा हुया था.
दिसम्बर २००२ मे बहुत बर्फ़ गिर ओर काफ़ी दिनो तक गिरती रही, आम आदमी तगं हो गये थे, तभी उन्ही दिनो एक लुफ़्थन्सा का प्लेन वियाना से चला ओर उसने मुनिख उतरना था, लेकिन वियाना से चढते वक्त ही पाय्लेट को पता चल गया था की प्लेन के पहिये खुले गे नही, लेकिन उस ने हिम्म्त नही हारी, ओर प्लेन को हवई पटरी से पहले ही बाहर बर्फ़ पडे खेतो मे उतार दिया, उतारने से पहले सारा पेट्रोल खाली कर दिय था, ओर उस बर्फ़ ने गद्दे का काम किया, सभी ३१ यात्री सुरक्षित रहे, जिन मे हमारे दोस्त ओर उन का परिवार भी था.

1 comment:

दिनेशराय द्विवेदी said...

हाँ जी। साहस ही जिलाता है। पायलटों ने दोनों बार अपनी युक्ति से खुद के साथ औरों को भी बचाया और 1-3-08 की घटना का वीडियो तो किसी न्यूज चैनल पर आज ही देखा है। कमाल किया पॉयलट ने। वह तो यात्रियों के लिए भगवान ही हो गया।