27/03/08

चिंतन गलत ओर सही पेसा

चिंतन यानि आज का विचार, पेसा,दोलत सभी कॊ चहिये, लेकिन जो पेसा हम अपनी मेहनत से कमाते हे, वही पेसा हमे अच्छी ओर शान्ति की जिन्दगी देता हे, उस से हमे सुख भी मिलता हे, जो पेसा हमे ने गलत ढ्ग से लिया हो, जेसे रिश्वत, घुस खोरी, चोरी से, दुसरे का हक मार कर वेसा पेसा कभी भी नही फ़लता फ़ुलता, हा कुछ समय तो हमे यही लगता हे, की इस पेसे से हम हम सारी खुशिया खारीद सकते हे, लेकिन यह हमारा भ्रम ही होता हे, ओर ऎसा पेसा साथ मे जाते वक्त घर के सुख, शान्ति ओर प्यार सब ले जाता हे,ओर छोड देता हे बरवादी..
गलत ओर सही पेसा
एक बार एक पिता अपने दो बेटो के साथ साथ वोटिगं ( नांव चला) कर रहा था, जब वोट बीच झील मे पहुची तो छोटे बेटे ने देखा नाव मे एक छेद से पानी आ रहा हे, उस ने झट से यह बात अपने पिता से कही, ओर साथ मे पुछा पापा मे एक ओर छेद कर देता हु इधर का पानी दुसरे छेद से निकल जाये गा,पिता ने कहा नही बेटा, तुम उस छेद से पानी के अन्दर आने को रोको,इतना सुनते ही बेटा उस छेद पर एक बडी लकडी रख कर वॆठ गया, फ़िर बडे भाई ने जल्दी जल्दी अन्दर घुसे पानी को बालटी से बाहिर फ़ेक दिया, ओर पिता जल्दी जल्दी दे वोट को किनारे ले गया.
सब से भगवान का शुक्र किया, फ़िर पिता ने दोनो बच्चो को बिठा कर समझाया, देखो बेठा देखो बेटा जब नाव मे गलत डंग से पानी आये तो उसे जल्द से जल्द बहिर फ़ेको, ओर जिस जगह से पानी आ रहा हे उस को भी बन्द करो वरना नाव डुब जाये गी,यही बात घर पर भी लागु होती हे,जब घर मे गलत ढंग पेसा आये गा तो घर वाले उसे खर्च करने के कई कारण ढुडे गे,ओर सभी नाजाय्ज खर्च करे गे सभी की आदते खराब होगी, आयाश ,शारबी,जुआरी ओर भी गन्दी आदते उन मे आ जाये गी इस लिये कभी भी घर मे भी गलत पेसा मत आने दो, अगर आए तो उसे जल्द से जल्द बहिर फ़ेक दो, ओर उस रास्ते को बन्द करो जहा से गलत पेसा आ रहा हे वरना नाव की तरह उस घर का डुवना भी निश्चित हे,क्यो की मेहनत की कमाई से यह सब बुराईया नही आती,बाड आने से ओर भी तबाहिया साथ आती हे, क्योकि वो पानी गलत ढग से आया हे,उसी तरह से गलत ढग से आया पेसा भी वही त्बाहिया लाता हे.ओर जेसे बाड का पानी जाता हे तो भी बिमारियां छोड जाता हे ओर गन्दगी फ़ेला जाता हे, उसी तरह से गलत गलत ढग से कमाया पेसा जब आता हे तो गन्दगी साथ लाता हे, ओर जब जाता हे तो भी गन्दगी , बिमारियां ओर तवाहिया छोड जाता हे.

8 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

आप का आज का दृष्टान्त शानदार है। बधाई। मैं इस का उपयोग जरुर करूंगा।

जोशिम said...

सही कहा - मेरा भी विश्वास है ऐसा पैसा बिल्कुल नहीं फलता - ऐसे बड़े माजरे देखे हुए हैं - लेकिन लोभ बड़े छुपे रास्तों से भी आता है -

Udan Tashtari said...

उत्तम उद्धरण...उत्तम सीख...मगर एक छेद वाले याने गलत ढ़ंग से पैसा अंदर करने वाले आजीवन ऐश करके निकल जा रहे हैं, तब अफसोस होता है इस सीख पर..

पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said...

एक बार फिर जगाने के लिये आभार।

सुनीता शानू said...

सही बात है अति हमेशा से खराब रही है...

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

बहुत खूब... आप सचमुच कमाल हैं

Dr. Chandra Kumar Jain said...

राजा साहब,
ब्लॉग पर आपकी शुभ भावना का आभार.
पर खुशी इस बात की है कि
आपके सुंदर-जीवन-निर्माणकारी चिंतन
को जीने के सार्थक पल मिले.
बहुत अच्छा लग रहा है.

राज भाटिय़ा said...

आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद.