11/03/08

काश वे मेरी बात मान लेते

ब्रिटेन की पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ता अगर 12 साल की रुख़साना की गुहार सुन लेते तो उसकी ज़िंदगी कुछ और ही होती पुरा पढने ले लिये यहां दबाये......

2 comments:

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

दिल से आह भी नहीं निकलती..दुनिया बहुत गन्दी है...

राज भाटिय़ा said...

सुनील भाई दुनिया बहुत अच्छी हे, भगवान ने इसे बहुत अच्छा बनया हे, हमीं ने यहां गन्द डाल दिया हे, टिपण्णी के लिये धन्यवाद.