11/03/08

चिंतन (कर्म )

आज का चिंतन,हम कर्म तो हर दम करते हे, उद्देश्यहीनता एवं उद्देश्यसहित, हम कोन सा कर्म कर रहे हे,उद्देश्यहीनता कर्म समय की बरबादी, ओरो का नुकसान,ऎसे कर्म जिस मे कोई उद्देश्या हॊ वो सब का भला भी करते हे,ओर शबासी भी लेते हे...

चिंतन कर्म

आप ने अकसर देखा होगा, चुहा ओर चिंटी यह दोनो सारा दिन कुछ ना कुछ करते रहते हे, यानि दोनो कर्म करते हे, मेहनत करते हे, लेकिन चुहे का कर्म उद्देशयहीन हे, वो सारा दिन कपडे, किताबे, कागज ओर जॊ भी चीज हाथ लगती हे कुतरदेता हे,वो आपने समय का तो नुकसान करता ही हे, दुसरो का भी नुक्सान करता हे, चिंटी सारा दिन इधर उधर घुमती रहती हे,जहा भी कुछ काने को मिला, उठा कर अपने बिल् मे ले जाती हे,अपने समय का सदुपयोग करती हे, ओर किसी कॊ बिना बात नुक्सान भी नही पहुचाती, फ़िर सर्दियो मे, बरसात मे मजे से बेठ कर खाती हे जब की चुहा इन दिनो भुखा मरता हे, जिस ने सही कर्म किया वही सुखी भी हुया.

3 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

आप परिग्रह सिखा रहे है? जमाने को देखते हुए ठीक ही है।

anitakumar said...

raaj jii mere blog per aane kaa dhanyawaad, aap ka please email id dein taaki theek se thanks kahaa ja sake, chinti aur choohe ki baa t per is ke bilkul viprit ek kahaani mujhe bhi pataa hai kal bataati hun...:)

राज भाटिय़ा said...

आप का धन्यवाद टिपण्णी देने के लिये.