10/03/08

चिंतन (विश्वाघात )

आज का चिंतन किसी से विश्वासघात करना, किसी कॊ धोखा देना आसान हे लेकिन उस का फ़ल भुगतना बहुत कठिन हे,ना जाने किस रुप मे हमे उस विश्वासघात का बदला चुकाना पडे,आज का विचार
आज का चिंतन...
विश्वाघात
रघु ओर प्रेम दोनो ही बचपन के दोस्त थे, एक दुसरे को अच्छी तरहा से जानते थे, गरीबी से तगं आ कर दोनो ने सोचा चलो कही बाहर जा कर कुछ काम धन्धा करते हे,दोनो ने कुछ रुपये इकट्टे किये
ओर दिल्ली आ गये,जहा उन्होने हरी सब्जिया का काम शुरु किया,ओर दो साल मे ही उन का काम चल निकला, ओर अब वो करोडो मे खेलने लगे,रघु ने एक दिन प्रेम से कहा,चलो गावं चलते हे,दोनो ने १ सप्ताह बाद का प्रोगराम बनाया गांव जाने का,लेकिन प्रेम के दिल मे कुछ काला आ गया,ओर उसने अपने दोस्त रघु को जहर दे कर मार दिया, गांव मे जा कर काफ़ी नाटक किया ओर रघु के गरीब मां बाप को २०,०००रुप्ये दे दिये ताकि किसी को शक ना हो.
प्रेम कुछ दिन बाद शादी कर के, बीबी के साथ दिल्ली वपिस आ गया,अब उस का काम दिन दुनी रात चोनी तरक्की करने,पेसे की कोई कमी नही, दसियो नोकर,कुछ साल बाद प्रेम के एक लडका हुया,
उस के बाद ओर सन्तान नही हुई, लडका बहुत ही सुशील, मिलन सार, समय बीतता गया, आज समीर का २० वा जन्म दिन था, समीर यही नाम था प्रेम के लडके का, दिल्ली के सभी नामीगिरामी लोग उस पार्टी मे थे,ओर पार्टी दुसरे दिन सुबह तक चली.
दूसरे दिन अचानक समीर की तबियत खराब हो गई,शाम तक कोई अराम ना आया, दिल्ली शहर के अच्छे अच्छे डाकटर, आये लेकिन दिनो दिन समीर की सेहत गिरती गई, ओर कोई आराम ना आया,
ड्राकटरो की राय से प्रेम उसे अमेरिका ले गये, एक महीने के बाद भी कुछ आराम ना आया,अब समीर के मां बाप को बहुत फ़िक्र हुई, उन्होने हर ईलाज करवाया लेकिन कोई असर नही हुया, इसी तरह से ६ साल बीत गये ,प्रेम का काम भी खत्म हो गया, लेकिन बेटे के प्यार के आगे प्रेम काम को भी भुल गया,अब प्रेम को रोटी के भी फ़क्के करने पडते थे,
एक दिन प्रेम अपने बेटे को ले कर किसी फ़कीर को देखने ले जा रहा था,अभी घर से निकला ही था की बेटे ने अजीब सी आवाज मे अपने पापा कॊ पुकारा... प्रेम तु मुझे भुल गया लेकिन मे तुझे नही भुला, देख जहा से हम दोनो ने जिन्दगी शुरु की थी तु आज बही उसी रुप मे खडा हे, ओर पहले से भी गरीब हो कर, प्रेम को लगा कही आसपास रघु हे,तभी प्रेम को झटका सा लगा बेटे को देखा वो तो कब का चला गया बाप को छोड कर.

2 comments:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

आपका कथन हर समय हर काल में सत्य ही रहेगा। हम जैसा दूसरों के साथ करेंगे, आने वाले समय में हमारे साथ भी वैसा ही होगा।

राज भाटिय़ा said...

जाकिर भाई धन्यवाद.