05/01/08

Lauterbrunnenलौतेर्ब्रुन्नें से Interlaken






हम लौतेर्ब्रुन्नें (Lauterbrunnen) से आगे बढे ओर Trümmelbach (तरउएमलेबाख)आगऎ, यहा बाहर कार पार्क की, सब ओर शान्ती थी,एक छोटा सा रेस्ट्रा था,हम ने सोचा शायद हम गलत जगह पर आ गये हे,तभी एक तरफ़ कुछ लोग जाते दिखे ओर हम भी पीछे चल दिऎ,आगे जा कर टिकट लेनी पडी,टिकट ले कर थोडा आगे जाने पर पानी गिरने की आवाज आ रही थी फ़िर सब पहाडी पर चढने लगे थोडा चढने के बाद हमे एक लिफ़्ट दिखी जो पहाडी के बीच बनी थी १०,१५ लोग उस लिफ़्ट मे चढ गये,ओर वो लिफ़्ट हमे काफ़ी ऊपर ले गई,जब लिफ़्ट से उतारे तो पाया हम काफ़ी उपर हेओर हमारे चारो ओर पहाड था,यानि हम बीच मे,ओर हवा खुब जोर से चल रही थी,थोडी थोडी सर्दी भी मह्सुस हुई हम अपनी गर्मियो की जाकेट हमेशा साथ रखते हे, फ़िर शुरु हुआ कुदरत का नजारा हम पहाडी के बीच मे झारने के चारो ओर धीरे धीरे उपर की ओर जा रहे हे, झारने का पानी कभी कभी शरराती बच्चे की तरह से हमे भीगो देता था एक दुसरे की बात भी नही सुनी पड रही थी,फ़ोटो ओर विडियो भी नही बना पा रहे थे,पानी की बोछारो का मजा खुब आ रहा था ,उपर जा कर देखा तो विश्वास नही होता था उपर हम से कुछ दुरी पर दो पहाड आपस मे मिले हुऎ थे ओर हरी हरी घास नजर आ रही थी नीचे देखे तो झरना कभी दाये कभी बाऎ,ओर अब सब को थोडा थोडा डर भी लगने लगा था,लेकिन दिल करता था यही रुके रहे,फ़िर हम सब नीचे फ़िर लिफ़्ट से बिलकुल नीचॆ आगये उपर का चित्र यही का हे,



इस के बाद हम Stechlberg स्तेखल्बेरग से होते हुये आगे ग्रिन्देल्वाल्ड आ गये,स्तेखल्बेरग का इलाका बहुत हि सुन्दर हे,नीचे का चित्र ग्रिन्देल्वाल्ड का हे,
उपर वाले चित्र के बारे हमे लोगो ने ओर हमारे गाईड ने बताया था,हमने भी इस पहाडी को तीन तरफ़ से देखा तो उन लोगो की बात कुछ सच लगी ध्यान से देखने पर उपर वाली चोटी कभी गणेश जी की मुर्ती लगती हे तो कबी शिव जी लगते हे,आप भी इस चित्र को बडा कर के देख सकते हे,ग्रिन्देल्वाल्ड भी बहुत ही सुन्दर लगा,चारो ओर हरयाली ओर ऊचे ऊचे पहाड चारो ओर रगविरंगे फ़ुल झारने ही झारने पुरी घाटी मे शान्ती, यहा से निकल कर हम लोगो ने कुछ भोजन किया फ़िर हम Interlaken मे आ गये, यह शहर पहडियो के बीच बसा हे बीच मे काफ़ी लम्बी झील हे,पुरा शहर बहुत ही सुन्दर हे

के स्टेशन का एक चित्र नीचे हे,लेकिन यहा तांगे भारत की तरह नही यह तो शोकिया हे,आप नीचे वाले चित्र का मजा ले,मिलते हे कल फ़िर

2 comments:

दीपक भारतदीप said...

आपने जो यात्रा वृतांत प्रस्तुत किया वह पढ़कर अच्छा लगा. मुझे ऐसे वृतांत पढ़ने में मजा आता है.
आपसे निवेदन है ब्लोग की सैटिंग में जाकर वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें इससे कमेन्ट में असुविधा होती है.
दीपक भारतदीप
दीपक भारतदीप

राज भाटिय़ा said...

दीपक भारतदीप जी नमस्कार,आप के पधारने का,ओर सलाह का धन्य्वाद, आईदा भी मार्ग दर्शन करते रहे.
राज भाटिया