25/01/08

हमारी ईटली यात्रा भाग ८



नमस्कार, आज आप को हम नेपल्स (Naples ) की सेर करवाऎगे, नेपल्स रोम करीब १९० कि.मी दुर हे,लेकिन हम ने नेपल्स से थोडा आगे जाना था, जगह का नाम सल्फ़ातोरे हे,




आज भी सभी बहुत जल्द उठ गये,पता नही नयी जगह या फ़िर बिस्तर दुसरे थे या गर्मी थी इस लिये इटली मे हमे नींद बहुत कम आती थी या फ़िर रोज नयी जगह देखने का शोंक था, ओर सब सुबह ८ बजे कार मे बेठ गये, हमारी कार भी कई दिनो से आराम कर रही थी, ज्यादा से ज्यादा स्टेशन तक फ़िर आराम करती, सो आज तो चलना ही पडा, मेने नविगेशेन सेट किया नेविगेशेन हमारी मंजिल २०८ कि.मी दिखा रहा था,मेने अंदाज लगाया की हम १,३० २,०० घण्टे मे पहुच जायेगे,




हमे रात को ही हमारी मकान मल्किन ने बता दिया था की नेपल्स बहुत ही खतरनाक जगह हे, यहां आप ने बहुत चुस्त रहना हे,चोर, जेबकतरे,ऎसे ही बहुत से अपराधी यहां थोडे ज्यादा हे, अपने केमरे, विडियो केमरे, ओर पर्स का बहुत धयान रखना, ओर हमे एक पर्स दिया जो गले मे डाल कर कमीज के अन्दर छुप जाता था, ओर कार भी खास जगह पार्क करना वगेरा वगेरा.




हम नेपल्स करीब ९,३५ बजे पहुच गये,अब जो जगह हम ने नेबीगेशन मे दि थी बहां पर कुछ भी नही था, थोडा आगे जाने पर एक सज्जन से पुछा तो उन्हो ने बताया की यहा से ५ मिन्ट क ओर रास्ता हे,मे उन के बताये रास्ते से एक मोड पहले ही मुड गया, लेकिन यही गलती काफ़ी थी, ओर मुझे एक चक्कर फ़िर से हाईवे पर लगाना पडा, ओर १, ४०€ टोल्टेक्स देना पडा,आधे घण्टे के बाद फ़िर बही पहुचे जहां से सज्जन ने रास्ता बताया था,दुसरी बार फ़िर बही गलती होती इससे पहले सबी तेयार थे, ओर मेने भी ओरो की पर्वाह ना करते हुऎ स्पीड काफ़ी कम रखी कार की.




ओर जनाब आखिर हम पहुच ही गये सलफ़्तोरे पर, यहां हम ने गेट के अन्दर जा कर कार पार्क की, आगे जाते इस से पहले ही हमे ३,४ लोगो ने घेर लिया, ओर उन्होने हमारी कार की नम्बर पलेट से देख लिया था, सो जरमनी मे हम से बाते करने लगे, बातो से पता चला की इन की सामने दुकाने ओर होटेल वगेरा हे, ओर उन्हो ने हमे अपने अपने कार्ड भी दिये जाने से पहले आप हमारे जहां जरुर आये,हमारे पास यह हे बो हे ओर हमारा समान असली हे, इन लोगो से मुश्किल से जान छुडाई थोडा आगे जा कर पर्स चेक किया,ओर आगे बढे, लेकिन यह कया यहां भी इन्टेरी के पेसे दो, जहां से टिकट ले कर हम थोडा आगे गये तो पाया की हम जबालामुखी के बिल्कुल बीच मे खडे हे हमारे चारो ओर पहाडियां हे, वो तो भगवान का शुक्र जबालामुखी ठ्ण्डा था, वर्ना.... यहां बहुत ही गर्मी थी, पावं नीचे से जलते हुये मह्सुस हो रहे थे,जमीन के नीचे से अभी भी बहु सी गेसे निकल रही थी चारो ओर अजीब सी गेसो की, गन्धक की, ओर तेजाब जेसी गेसो की गन्ध आ रही थी, अभी भी कई जगह से सुस्स्स्स्स्स्स करती हुई आवाज के साथ जमीन के नीचे से अजीब सी गरम हबा या आग,या कुछ ऎसा ही निकल रहा था,काफ़ी जगह तो जमीन बहुत ही गरम लग रही थी,कभी कभी छोटे पत्थर एक दम हबा मे उछाल जाते थे, हम ने यहां से काफ़ी फ़ोटो जुम करके लिये, ओर विडियो भी जुम करके लिया, जमीन से जगह जगह धुअया ऊठ रहा था, बच्चो ने छोटे बडे काफ़ी पत्थर इकट्टे किये,




यहां हर जगह चेतावानी के बोर्ड लगे थे, ओर काफ़ी बडी जाली लगी थी जिस के अन्दर जाना सख्त मना था,यहां हम ने वो देखा जो आज तक किताबॊ मे ही पढा था,मन तो बहुत था यहाम ओर घुमे लेकिन उपर से सुर्या देबता, ओर् नीचे जाबाला माई खुब गर्मी दे रही थी,इस लिये हमे यहां से अब जाना हई पडा,यहां हम करीब २,३ घण्टॆ रुके, फ़िर वपिस हम घर की ओर चल पडे, नेपल्स जाने की हिम्मत नही हुई,आप यहां से विडियो देख सकते हे ओर यहा से पुरी जानकारी प्राप्त कर सकते हे, अरे बाप रे बातो बातो मे कितना बडा लेख लिख दिया,अब कल कही दुसरी जगह घुमने ले चलुगा, तब तक के लिये..नमस्ते फ़िर मिलेगे कल

2 comments:

डॉ. राम चन्द्र मिश्र said...

भाटिया जी,आप भी कहाँ चले गये.. नेपल्स गये थे तो नेपल्स तो देखना ही चाहिये था, वहाँ से पास ही है, पोम्पेई और विसूवियस (ज्वालामुखी)। पोम्पेई रोमन काल का एक शहर था जो विसूवियस के लावा मे जिन्दा दफ़न हो गया था।

राज भाटिय़ा said...

डॉ. मिश्र जी, धन्य्वाद भाई हमे कोन सी जल्दी हे,
धीरे धीरे सब देख लेगे,अभी तो काफ़ी कुछ देखना बाकी हे पोम्पेई,ओर नेपल्स अगली बार ट्रेन से जायेगे,कभी २,४ दिन की छुट्टियो मे,फ़िर मजे से घुमऎगे