26/01/08

हमारी इटली यात्रा भाग ९






नमस्कार मित्रो, आज आप को ले चलते हे इटली मे एक नयी जगह जिस का नाम हे कास्काडा डेला मारमोरे (cascada delle marmore ) ओर यह तेरनी (TERNI ) शहर के पास हे.

** यह चित्र नीचे से जहां हम ने टिकट लिया**


मित्रो आज भी हम सब जल्द ही तेयार हो कर घर से सुबह सुबह ही निकल पडे,कयोकि कास्काडा देला मारमोरे दोपहर १२,०० बजे बन्द हो जाता हे,ओर हमे उस वक्त वह सब देखना था,कास्काडा देला मारमोरे एक झारना हे, जिसे इंसान ने बनाया हे, यह दुनिया का ऎसा पहला झारना हें,उपर एक पहाडी पर पानी रोक कर इस से बिजली भी बनाते हे, ओर इस झारने को वकत पर हि चलाते हे,तो जनाब हम घर से ८,०० बजे चले थे,रास्ते मे नाशता करते हुये हम कास्काडा देला मारमोरे ९,४५ तक पहुच गये थे, रास्ता आगे जा कर पहाडी था सो हम भी थोडी मस्ती मे कार चलाते हुये गये,हरयाली जर्मन जितनी तो नही थी, लेकिन मोसम जर्मन से बहुत ज्यादा खुब्सुरत था, हम ने कार पर्किग मे पार्क की ओर यहां से टिकट ली ओर चल पडे उस झारने की ओर जिसे देखने के लिये हम ने करीब १३० किमी का रास्ता तय किया था,यह १६५ मीटर (५४१ फ़ीट ) ऊचा हे,झारने से अभी हम काफ़ी दुर थे लेकिन बहां तक पानी की बॊछारे हमे भीगो रही थी, एक अदभुत सा नाजारा दिख रहा था, सामने ही इन्द्र्धनुष बिलकुल जमीन के पास दिख रहा था,ओर हम भीगते हुऎ झारने के पास से होते हुए उस पहाडी की ओर बढ रहे थे, ओर हमारा विचार झारने को उपर से देखने का था, साथ साथ मे हम चित्र भी ओर विडियो भी लेते जा रहे थे, ओर सुन्दर नजारो को देख भी रहे थे.यहां के बारे आप यहां से पुरी जानकारी प्राप्त कर सकते हे,

** पहाडी के ऊपर से जहां से झारना गिरता हे यह चित्र लिया गया हे ***

ओर अब हम पहाडी पर चढने लगे चाढाई एक दम सीधी थी, चढने मे मुस्किल आ रही थी, दोनो बच्चे तो हिरन की तरह से भागते भागते बहुत पहले ऊपर पहाडी पर चले गये, ओर हमारी बीबी की बस आधी पहाडी पर हो गई,वो वही से वपिस नीचे चली गई,सांस तो हमे भी खुब चढ गया था, लेकिन धुन का पक्का था कि एक बार समय से ऊपर पहाडी पर जरुर पहुचना हे,मेरी उमर के लोग तो अभी भी काफ़ी पिछे छुट गये थे, लेकिन बच्चे लोग फ़टाफ़्ट भागे जा रहे थे,अखिर मे भी ऊपर पहाडी पर पहुच गया, बच्चो को इशारे से बुला कर पानी मागां पानी पी कर थोडी हिम्म्त जागी. फ़िर हम जल्दी जल्दी उस जगह पहुचे जहां से झारना नीचे गिरता हे, पहाडी के ऊपर से फ़ोटो ओर विडियो लिया,यहा पता चला की आज एक बजे झारना बन्द हो गा, बच्चो ने कहा की हम बन्द होते झारने को सामने से देखना चाहते हे, केसे झारना धीरे धीरे बन्द होता हे,



फ़िर सभी भागे नीचे, बाकी लोग भी शयाद हमारी तरह ही सोच रहे थे, सभी जल्दी जल्दी नीचे आ रहे थे, फ़िर हम समय से नीचे आ गये तो झारने का वो रुप भी बहुत प्यारा लगा,

** यहां देखे यह चित्र वही से लिया हे जहां से पहला चित्र लिया था, लेकिन यहां झारना बन्द हो गया हे*

कुछ चित्र आप भी देखे...



2 comments:

रंजू said...

पहले लिखे की तरह रोचक और ज्ञान वर्धक लगा आपका यह यात्रा विवरण ,,,बहुत सुंदर चित्र !!

राज भाटिय़ा said...

धन्यवाद रंजु जी.