31/01/08

कमाई

यह लघु कहानी मेने कई साल पहले यही कही पढी थी,ओर मेरी आदत हे जो बात मुझे अच्छी लगे उसे सम्भाल कर रखता हु,बाकी बातो को ध्यान ही नही देता, यह कहानी हे तो छोटी सी व्यागं के रुप मे आज के हालात पर एक करारा तमाचा हे.साथ मे माफ़ी चहाता हू उस बेबसाईट से जिस की इजाजत के बिना इसे यहां प्रकशित कर रहा हू क्योकि मे उस बेबसाईट का नाम भुल गया हु, हां लेखक हे इस कहानी के**हरिनारायण जोशी**

तो प्रस्तुत हे उन की एक लघु कहानी आज के हालात पर एक करारा व्यागं....

कमाई
हरिनारायण जोशी
गर्मी का मौसम था। चिलचिलाती धूप धरती को तपा रही थी। शहर से लगभग आठ कि.मी. दूर जगाधर अपनी गुलाब की बगीची में गुडाई कर रहा था। इस भीषण गर्मी में जगाधर का चेहरा भले ही मुरझाया हुआ था, परंतु उसकी बगीची में गुलाब खूब खिल रहे थे। यकायक आने वाले कारों के एक काफिले ने जगाधर का ध्यान तोडा। कारों का यह काफिला विज्ञापन की शूटिंग वालों का था। शायद वे कहीं खेतों में शूटिंग करने जा रहे थे। जगाधर अपनी जगह खडा होकर एक के बाद एक निकलने वाली कारों को देखने लगा। देखते-देखते ही जगाधर की बगीची के पास एक कार रुकी। बिना आवाज किए कार का दरवाजा खुला, कुछ ही क्षणों में लगभग 17-18 वर्षीय एक लडकी (मॉडल) कार से उतरकर बगीची की ओर बढी। उसके शरीर पर वस्त्र बहुत कम थे। जो भी थे वे अंगों को ढंकने के बजाय उन्हें और अधिक उभार दे रहे थे। शायद उसे खिले हुए गुलाब भा गए थे। उसने हल्की सी मुस्कान बिखेरते हुए बगीची से कुछ फूल चुने। जगाधर कुछ घबराया हुआ सा उसके पास पहुंचा, चाहकर भी वह उसे फूल तोडने से नहीं रोक पाया। अपने चेहरे पर रंगीन पत्रिका से छाया बनाते हुए उस लडकी ने जगाधर के पसीने से चुचुआते चेहरे की ओर देखकर पूछा- 'तुम इस धंधे से कितना कमा लेते हो? जगाधर ने बनावटी हंसी के साथ कहा- 'यही साल के कोई दस-बारह हजार। वह लडकी हंसी और कार की ओर मुडती हुई बोली- 'ं ऽऽ...इससे तो चार गुना मैं एक शॉट में ही कमा लेती ं। अर्ध्दनग्न शरीर से इठलाती हुए वह कार में बैठ गई। ...जगाधर यह सोचता रह गया कि वास्तव में कमाई है क्या? वह अनसमझी निगाहों से उस कार को तब तक देखता रहा, जब तक वह ओझल न हो गई।

2 comments:

prakash said...

भाटिया जी,कमाई का माडल द्वारा दी गई परिभाषा हम सही नहीं मानते,खैर देश काल के अनुसार परिभाषाएं बदलती रहती हैं।व्यंग्य अच्छीहै।हरिशन्कर्जी के साथ-साथ आपको भी बधाई।

राज भाटिय़ा said...

प्रकाश जी नमस्कार,आप की टिपण्णी से मे सहमत हू, धन्यवाद