07/01/08

चुट्ट्कले ऎसे ही तो बनते हे

बात १२,१३ साल पुरानी हे,तब मेरा बेटा ३साल के करीब था,ओर उन दिनो किन्दर्गर्डेन मे जाया करता था,दिसम्बर-जनवरी का महीना था,बर्फ़ खुब पडी थी ओर सर्दी भी काफ़ी (-१६c ) थी, उस दिन, अब आप मां बेटे की बात पढे, सुबह सुबह मेरी बीबी लडके कॊ तेयार कर रही हे किन्दर्गर्डेन लेजाने के लिऎ....
माँ- मेरा बेटा बहिर बहुत सर्दी हे( गर्म जुरबे,जकेट,मफ़रल,दस्ताने ओर टोपी वगेरा पहनते हुऎ) तुम अकेले बाहर मत जाना वगेरा वगेरा,बच्चे को पुरी तरहा से ढक कर घर से बाहर आते हे, थोडी चलने पर पडोसी मिलता हे,
पड़ोसी- दोनो को सुबह की नमस्ते के पश्चात- ओ आज तो बहुत सर्दी हे ना।
बेटा - थोडी दुर जाने के बाद मां इसे केसे पता चला की आज सर्दी हें।

ऎसे ही एक बार मेरी साली का फ़ोन भारत से आया सब ने बात की,अब साली जी ने पुछा बच्चे कहां हे हम ने फ़ोन बच्चो को दे दिया,
मोसी- (बच्चो की ) हेलो बेटा कया हाल हे
बेटा - ठीक हे
मोसी- हमारी याद आती हे
बेटा - नही आती
हम ने बाद मे बच्चे से कहा बेटे ऎसा नही बोलते, तुम ने कहना था मोसी याद खुब आती हे
बेटा झट से बोला आप ही तो कहते हे कभी झुठ नही बोलना, मुझे अब बताओ मुझे झुठ बोलना हे या सच?

3 comments:

संजय बेंगाणी said...

सहज सरल होती है, बच्चों की दुनिया.

अच्छे किस्से.

रंजू said...

बच्चे मन के सच्चे :)

राज भाटिय़ा said...

संजय बेंगाणी जी ओर रंजु जी टिपण्णी के लिये धन्य्वाद