03/01/08

राईनफ़ाल Rheinfall





नम्स्कार,तो हम सब उसजगह पहुंच गये, अवाज तो काफ़ी दुर से ही आनी शुरु होगई थी,लेकिन पास जा कर जो द्र्श्य देखा तो जेसे आंखे झपकणा ही भुल गई हो,अति सुन्दर द्र्श्या मानो दुध की नदी वह रही हो,इस स्थान से नदी एक दम नीचे गिरती हे झारने के रुप मे ओर नीचे जा कर वही पानी बहुत बडी नदी का रुप धारण कर लेती हे, उपर चित्र मे बीच मे दो चठ्ठने हे, दाये हाथ वाली चठ्ठान पर लोग चढते हे,ओर वहा से चारो ओर देखने का मजा कुछ अलग ही हे,कुछ चित्र यहा से लिये फ़िर हम धीरे धीरे इस झील के किनारे किनारे आगे बढते चले गये,झील का पानी बिल्कुल साफ़,आप नीचे तक मछलिया देख सकते हो, युही धीरे धीरे हम झील के सामने की तरफ़ पहूच गये,ओर यहा से झील ओर भी सुन्दर लगा रही थी,अगर कवि होता तो जरुर कविता लिखता,मन नही करता था आंखे हठाने को,करीब हमे २ घन्टे हो गऎ थे यहा आऎ,बच्चे भी शयाद थक गये थे,थोडा बेठे कुछ चाय पानी लिया ओर फ़िर चल पडे, थोडा आगे जा कर देखा तो लोग झील के बीच वाली चठ्ठान पर जा रहे थे,दिल तो हम सब का किया कि वहा जाया जाये,लेकिन केसे ?तभी मेरे छोटे बेटे ने बताया की वहा जाने के लिये नाव मिलती हे,लेकिन पानी का बहाव देख कर डर लगा तभी देखा कि वहा तक बडी वोट भी जाती हे, हम सब ने टिकट ले कर वोट द्रुवारा उस चठ्ठान पर विजय पा ली,अब हमारे चारो ओर झारना था कभी कभी पानी हमे भिगो देता था,अब सीडीयो के साथ हम उस चठ्ठान के ऊपर चढ गये,डर,उत्सुकता सभी थे, कुछ देर के बाद हम सब वापिस नीचे आ गये ओर वोट दुवारा जमीन पर आ गये,अब तक काफ़ी समय बीत चुका था ओर पेट मे भी चुहे कुद कुद कर थक चुके थे,फ़िर सब ने मिल कर खाना खाया थोडा आराम किया, आज यहा पर हम काफ़ी घुमे शाम के करीब हम ईनतारलकेन की तरफ़ चल पडे मिलते हे कल ईनतारलकेन मे।

2 comments:

राम चन्द्र मिश्र said...

भाटिया जी आपके साथ स्विटजर्लैन्ड घूमने मे मज़ा आ रहा है, लिखते जाइये।

राज भाटिय़ा said...

मिश्र जी ,ध्न्यबाद,अरे आप को जरुर घुमाये गे