06/04/10

आज मन बहुत उदास ओर दुखी है........

अभी लेपटाप कोई लेने नही आया, शायद कल परसॊ आ जाये, या घर पर ही ठीक कर जाये, पता नही, तब तक मै यहां  आप सब के साथ ही हुं...
एक दुखद सुचना..... आज हमारी १० साल की एक चिडियां चल बसी, जो शायद मेरा इंतजार ही कर रही थी, सुबह सब ठीक थी, दोपहर बाद चीं चीं करती रही फ़िर चुप हो जाती, जब मै घर आया तो उस की आवाज मेरे कानो मै पडी तो मेने कहा इसे तंग मत करो, तो बीबी ने कहा यह दोपहर से ही इस तरह से आवाज निकाल रही है, तो मेने उसे हाथो मै लेकर प्यार किया, ओर उस के पंख वगेरा चेक किये, दोनो पेर चेक किये सब ठीक ठाक थे, फ़िर सारा शरीर देखा सब ठीक बच्चो ने कहा कि डाकटर के पास ले चलते है, मेने कहा अपह्ले देखे तो सही इसे है क्या, फ़िर मेने उसे प्यार किया ओर वापिस उस की जगह बेठा दिया.

थोडी देर बाद बडे लडके ने देखा तो वो नीचे लेटी थी आंखे बंद किये हम ने उसे बुलाया, कोई हरकत नही हुयी, हम सब का दिल बहुत खराब हुया, अभी उसे नीचे जा कर नदी मै बहा देगे, यह चिडिया जिस का नाम हम ने हांसी रखा था, हमारे साथ बोलती थी, हमारे बोलने के शव्दो की नकल करती थी, ओर हमारे साथ खेलाती भी थी. खाने के समय उसे भी खाना ना दो तो शोर मचाती थी, रात को आठ बजे के बाद उस के कमरे मै कोई लाईट जगा दे या आवाज करे तो बहुत जोर से शोर मचाती थी.
अब हम ने सोचा कि आगे से कोई भी चिडिया नही पालेगे..... इन के जाने से बहुत दुख होता है.........
भगवान  अगर सच मै दुसरा जन्म देता है तो अगले जन्म मै इसे जरुर किसी अच्छी योनि मै जन्म दे, क्योकि यह हमारे पास करीब दस साल रही , ओर सब के मन को भाती थी

31 comments:

Shekhar kumawat said...

ham aap ke sath he is dukh me

shekhar kumawat


http://kavyawani.blogspot.com/

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सच में बहुत दुख होता जब कोई अपना चला जाता है।

डॉ. मनोज मिश्र said...

वाकई दुखद है.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

दुखद! उसकी आत्मा को शांति मिले

aarya said...

सादर वन्दे!
आपने गिल्लू की याद दिला दी यह भी कुछ उतनी ही मार्मिक घटना है.
याद तो हमें रखना चाहिए कि
जीने के साथ मरना भी लिखता है भगवान
फिर भी उसको भूल कर जीता है इन्सान
रत्नेश त्रिपाठी

Arvind Mishra said...

sad,which bird was this -a parrot or love bird?

मनोज कुमार said...

इन के जाने से बहुत दुख होता है.........
सच में बहुत दुख होता जब कोई अपना चला जाता है|

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa said...

पहले बहुत शौक था, पर एक बार ऐसे ही अपने प्यारे पपी के जाने के बाद से फिर किसी को नहीं पाला। घर के सदस्य बन कर दिल में जगह जो बना लेते हैं।

M VERMA said...

अत्यंत मार्मिक
ये हमारी तरह बोलकर अपना दुख नही बता सकते
हार्दिक सम्वेदना

राज भाटिय़ा said...

अर्विंदर जी यह चिडिया बेलने सिटी के नाम से जानी जाती है हमारे यहां , वेसे यह आस्ट्रेलिया मुळ की थी, तोते से मिलती जुलती लेकिन उस से छोटी....

मुनीश ( munish ) said...

may her soul rest in peace !

परमजीत बाली said...

किसी के साथ जब प्रेम का बधंन बंध जाता है तो उस से अलग होने पर दुख तो होता ही है...चाहे वो कोई भी जीव हो.

Shobhna Choudhary said...

स्कूल के वक़्त एक पाठ था हिंदी की किताब में गिल्लू, एक गिलहरी के बारे में था. आज यह पोस्ट पढ़कर वो याद आ गया.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

इन्सान चार दिन किसी के साथ रह ले, तब उसके साथ लगाव हो जाता है....आप लोगों नें तो उसके सथ दस साल व्यतीत किए हैं...सो उसके वियोग का दुख होना तो लाजिमी है...

Udan Tashtari said...

आपका दुख समझ सकता हूँ..मैं कई दिन अपसेट रहा जब मेरी चिड़िया एना मरी.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

आपके दुःख में शामिल हैं - श्रद्धांजलि!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपके दुख में हम भी सहभागी बन जाते हैं!

'अदा' said...

वाकई दुखद है....

दीपक 'मशाल' said...

dukhad to hai par chaliye us parinde ko pinjde se mukti mili..

seema gupta said...

बेहद दुखद, भगवन आपकी मनोकामना पूरी करे और इस नन्ही चिड़िया को अच्छी योनि मै जन्म दे


regards

जी.के. अवधिया said...

सचमुच बहुत दुःख होता है जब कोई अपना चला जाता है। हम आपके दुःख में साथ हैं राज जी। ईश्वर हांसी की आत्मा को शान्ति प्रदान करे।

Anil Pusadkar said...

मै समझ सकता हूं आपका दुःख भाटिया जी।हम लोगों ने भी अपने गोलू(पामेरियन)की मौत के बाद से दूसरा गोलू लाने की हिम्मत नही की है

मेरा देश मेरा धर्म said...

एक ही बात कहना चाहूँगा की आपकी चिड़िया बहुत भाग्यवान थी जो इतने सारे बुद्धि जीवी लोगों में उसके लिए समय निकाला, वो भी उस देश में जहाँ हजारों गायें रोज काट दी जाती हैं और इन बुद्धिजीवियों में से एक के भी ब्लॉग पर मैं इस विषय पर कुछ नहीं देख पाया !

धन्य है हमारा देश ! धन्य है हमारे देश की चिड़िया ! और महा धन्य हैं इस देश के बुद्धिजीवी !

!!!! बस एक ही धुन जय-जय भारत !!!!

खुशदीप सहगल said...

राज जी,
ये चि़ड़िया नहीं कोई फरिश्ता थी जो आप का हाथ लगने के बाद स्वर्ग की उड़ान भरने का इंतज़ार कर रही थी...

परिंदों की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता...

जय हिंद...

खुशदीप सहगल said...

राज जी,
ये चि़ड़िया नहीं कोई फरिश्ता थी जो आप का हाथ लगने के बाद स्वर्ग की उड़ान भरने का इंतज़ार कर रही थी...

परिंदों की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता...

जय हिंद...

खुशदीप सहगल said...
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pallavi trivedi said...

एक बार हमने भी एक तोता पला था....कुछ ही महीनों में मर गया! तब बड़ा दुःख हुआ था!

rashmi ravija said...

बहुत ही दुखद...आपके दुःख में शामिल हैं,हम सब

Jandunia said...

दुख की इस घड़ी में हम आपके साथ हैं।

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

हांसी को मुक्ति मिले। भगवान उसे बहुत प्यार दें!

Vijay Kumar Sappatti said...

raj ji namaskar .. sach me jab koi bahut dino tak bina kisi swaarth ke apne saath rah jaata hai aur ekaek chal basta hai to bahut hi dukh hota hai ....

aabhar

vijay
www.poemsofvijay.blogspot.com