02/04/08

चिंतन सही रास्ता

आज का विचार, हम अक्सर देखते हे भाई भाई मे, बहिन भाई मे ओर भी अन्य लोगो मे पेसो को ले कर ,जमीन को लेकर ज्यदाद को ले कर झगडे होते हे, जब की झगडे वाली चीज तो यही रह जाती हे, लेकिन, इस के पीछे बहुत ही मन मुटाव, भाई भाई का दुशमन बन जाता हे कई बार तो यही दुशमनी पुश्तो दर पुश्तो चलती हे तो आईये देखे आज का विचार शायद आप को भी पसंद आये....
सही रास्ता
बात काफ़ी पुरानी हे, राम धन एक बहुत बडा जमीदार था, उस के चार लडके ओर एक छोटी लडकी थी, धीरे धीरे सभी बच्चो की शादी हो गई, राम धन ने दुनिया को अच्छी तरह से जाना था, सो जब भी किसी लडके की शादी हुई, उसे दो महीनो मे ही अपने सए अलग कर दिया, साथ ही उसके हिस्से की जमीन उसे दे दी,लेकिन दिल से जुदा नही किया, अब सभी भाई अपने अपने घर पर खुशी खुशी रहते, ओर सब का एक ही आगंन था, बच्चो मे भी प्यार था, धीरे धीरे राम धन अब अपने आखरी समय की ओर बढने लगा था, सभी बहुएं ओर बेटे अच्छी सेवा करते थे.
एक जमीन का टुकडा ओर था, जिस ने राम धन को बेचेन कर रखा था, उस का हिस्सा कर नही सकता था, हिस्सा करने पर वह जमीन बेकार होती ,उधर चारो भाईयो की नजर उस जमीन पर थी,ओर हर बार बारी बारी सभी भाई उस पर अपना हक भी जता चुके थे,बस यही एक बात राम धन को बेचेन कर देती, यह जमीन दु तो किसे दु, कही यह छोटा सा टुकडा इस घर की खुशिया ही ना खा जाये, इसी की फ़िक्र मे अब राम धन की सेहत भी खराब रहने लगी, ओर भाईयो मे भी अब उस जमीन के कारण मन मुटाव रहने लगा,ओर जो लोग इस घर से चिढते थे अब भाईयो को अलग अलग भडकाने भी लगे थे,कभी कभी भाईयो मे बात बात मे इस जमीन की बात होती तो बड जाती थी बात,
आज राखी बंधन था, माया ( इन भाईयो की छोटी बहन) अपने पति के साथ आई थी भाईयो कॊ राखी बाधने, लेकिन पिता का गिरती सेहत देख कर हेरान रह गई, फ़िर भाईयो का बदल रुप भी देखा, इस बार माया को वो आंन्द नही आया मायके आ कर,तभी उसे पुरी कहानी पता चली, तो उस ने अपने पति से बात की, ओर दोनो ने कुछ बाते की दुसरे दिन माया का पति हमेशा की तरह से चला गया, लेकिन इस बार माया को दो दिन के लिये छोड गया,
शाम कॊ माया ने सभी भाईयो कॊ बुलाया ओर पिता के साथ बेठ कर उस जमीन के टुकडे के बारे बात शुरु करनी चाही, सभी घर बाले बेठे तो भाईयो ने अपने अपने राखी के उपहार अपनी बहिन को देने चाहे, तो बहिन ने कहा आज मे अपनी पसंद का उपहार लुगी,सभी भाईयो ने कहा मागंओ क्या मगंती हो बहिना,लेकिन पहले माया ने सभी भाईयो कॊ पक्का कर लिया अपने वचन पर, फ़िर कहा भाईयो हमारे गाव मे बच्चो का कोई स्कुल नही हे,तो भाई बोले यह तो हमे भी मालुम हे, माया ने कहा भाईयो जो जमीन का टुकडा पिता जी के पास हे अगर आप चाहॊ तो उसे स्कुल के नाम पर पंचाय्त को दे देते हे, अब सभी भाई एक दुसरे का मुंह देखने लगे, तभी माया बोली देखो हमारे बच्चे पढ लिख कर भी खेती कर सकते हे नोकरी कर सकते हे ओर इस स्कुल से कितनो का लाभ होगा, तभी बढा भाई बोला मेरी हां हे उस के बाद सभी ने अपनी तरफ़ से हां कर दी, ओर राम धन बोले माया तुम तो सच मे बहुत सयानी हो गई हॊ, दुसरे दिन ही सरपंच जी कॊ ओर पचंओ को वुला कर वो जमीन का टुकडा स्कुल के नाम कर दिया, ओर सभी भाईयो मे फ़िर से पहले जेसा प्यार हो गया,
एक साल के बाद उस गाव मे पहला स्कुल माया के नाम से खुला जो पाचंवी तक था, ओर आज वहां पर बहुत बडा स्कुल खुल गया हे जिस मे आसपास के गाव के बच्चे भी पढने आते हे,माया ने झगडे की जड को ही जड से काट दिया,क्यो ना हम भी ऎसा ही करे जब कभी हमारे जीवन मे ऎसी कोई सिथित आये, पेसो को छोड कर अपनॊ को अपनाये

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