24/03/08

बड्बोली बीबी

बडबोली बीबी
एक गरीब आदमी का मकान बरसात मे टपकने लगा,उस ने सोचा जब थोडा मोसाम ठीक हुया तो, छत की मरमत कर के, इस पर थोडी मिट्टी डालु गां, ३,४ दिन मे बरसात बन्द हो गई ओर वो आदमी अपनी बेलगाडी ले कर जगंल मे गया ओर एक जगह से मिट्टी खोदने लगा,अभी थोडी मिट्टी ही खोदी थी की उस की कुदाल से कोई चीज टकराई,आदमी ने हाथ से मिट्टी हटा कर देखा तो वहां उसे एक सन्दुक दिखाई दिया, उस आदमी ने चारो ओर देख कर जल्दी से उसे खोला, अरे वाप रे उस मे तो सोना ही सोना था,पहले तो उस आदमी ने उसे कही दुसरी जगह पर छुपा दिया, फ़िर भगवान का धन्यवाद किया,अब सोचने लगा अपनी बीबी को केसे बताऊ, क्योकि उस के पेट मे तो कोई बात रहती नही,ओर अगर उसे बता दिया तो एक दिन मे ही सारी दुनिया को पता चल जाये गा,तभी उस के दिमाग मे एक तरकीब आई.
उस आदमी ने एक बहुत बडा मच्छली पकडने का जाल लिया ओर एक बकरी को जाल मे फ़सा कर नदी मे जाल डाल दिया, फ़िर एक झाडी के पिछे २,३ मच्छलिया पकड के डाल दी, फ़िर पेडो पर उसने बातशे ओर मिश्री रख दी, ओर कुछ बातशे ओर मिश्री उस से आगे मेदान मे डाल दी, फ़िर मिट्टी की भरी गाडी ले कर घर गया, ओर बीबी से बोला मिट्टी कल डाले गे, चलो कुछ खाने को दो, दोनो ने मिलकर खाना खाया, फ़िर आदमी बोला काफ़ी दिनो बाद मोसाम साफ़ हुया हे चलो थोडा घुम आये ओर शिकार भी कर ले बीबी जल्दी से तेयार हो गई, पेड के पास गये तो आदमी ने एक बीबी की आंख बचा कर एक डाल को थोडा हिलाया, ओर साथ मे बोला अरे यह कया, बीबी ने देखा बातशे ओर मिश्री को देख कर कहा, ओ आज तो बातशो ओर मिश्री की बरसात हो रही हे, ओर उस ने जलदी जलदी उन्हे इकट्टा किया, फ़िर आगे मेदान मे भी बातशे ओर मिश्री देख कर बहुत खुश हुई,थोडा आगे जाने पर नदी आई, तो आदमी ने कहा आओ मच्छली पकडते हे, लेकिन बीबी तो बातशे खा रही थी, उसे पता ही नही चला कब जाल फ़ेका हे,तभी आदमी चिल्लाया अरे भग्वान थोडी मदद करो जाल तो खीचां ही नही जा रहा, दोनो ने जाल खींचा तो बीबी बहुत हेरान हुई,रे बाबा इतनी बडी बकरी , तभी आदमी ने कहा, आओ आज तीतार भी मार लेते हे,आज तीतार खाये गे कल बकरी, एक घनी झाडियो मे आदमी ने जोर से भाला फ़ेका,जब भाले कॊ वापिस लाया तो उस मे २ बडी बडी मच्छलिया थी, बीबी बोली कया जामाना आ गया हे नदी मे जाल मे बकरी, ओर झाडिओ मे मच्छ्लिया, ओर बातशो ओर मिश्री की बरसात,
तभी आदमी सोने का सन्दुक भी ले आया.
अब घर जाते ही, बीबी ने हर सहेली को सारी बाते बतानी शुरु कर दी,दो दिन मे ही पुरे शहर मे यह बात सब को मालुम हो गई,तीसरे दिन सुबह सुबह राजा के सिपाही उस के घर आये ओर उसे पकड कर राजा के पास ले गये,राजा को देख कर उस आदमी ने प्राणाम किया,तो राजा ने पुछा कहां हे बॊ खाजाना जिस के बारे हम सुन रहे हे, तुमे मालुम हे तुम इस राज्या के नागरिक हो, जो भी किमती चीज तुम्हे मिले वो राजा की हे, बोलो कहा हे खाजाना.
आदमी ने कहा महाराज आप कोन से खाजाने की बात कर रहे हे मुझे नही मालुम, हां अगर मुझे कोई खाजाना मिलता तो मे आप के पास ही लाता,राजा ने कहा तो कया तुम्हारी बीबी झुठ बोल रही हे,आदमी बोला आप खुद हि मेरी बीबी से पुंछ ले,तभी सिपाही उस की बीबी को भी महल मे ले आए,राजा ने उस की बीबी से पुछा तो बीबी बोली हा महाराज उस दिन बातशो ओर मिश्री की बरसात हुई, फ़िर हम्ने नदी मे जाल्डाल कर बकरी पकडी फ़िर हम ने जगल मे झाडियो मे से २ मच्छ्लिया पकडी, इतना सुन कर सारे लोग हंस्ने लगे ओर राजा ने कहा इस मुरख ओरत को जलदी से निकालो, ओर उस आदमी को थोडा इनाम दे कर भेज दिया,थोडे दिनो बाद उस आदमी ने व्यापरी का वेष बना कर अपना काम् शुरु कर लिया ओर दुसरे शहर मे जा कर आराम से रहने लगा.
अगर आप को मिल जाये ऎसी बीबी तो आप कया करेगे?

5 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

अब तो सोचने का स्कोप ही नहीं रहा एक ही बहुत है। हाँ शोभा की जगह मैं ही कुछ बड़बोला हूँ। वह महिला होते हुए भी बहुत कुछ पचा जाती है।

सुनीता शानू said...

हा हा हा...आप ही बताईये क्या करेंगें?

राज भाटिय़ा said...

दिनेश जी आप की बात बिलकुल ठीक हे, सुनीता जी २० साल पहले शादी की तभी से मे ही ज्यादा बोलता हू,अब हम कया बताये ?आप का धन्यवाद

mehek said...

:):):)ha ha ha very nice story

ramkrishna said...

kahani ke roop me rochak hai.lay me hai.lakin niji jindagi me dekhein to koi biwi itni sidhi nahi hoti ki jo aap samjhayen vahi samjhe.