18/03/08

चिंतन बदला

आज का चिंतन बुराई पर अच्छाई की जीत,हम अकसर देखते हए गलीयो, मुह्हलो, सडकॊ पे ओर आजकल यहां भी लोग एक दुसरे को गालिया देते हे,ओर यह आदान प्रादान बहुत होता हे,ओर उन गालियो मे कितनी आशिलता होती हे ओर सुनने वाले उन लोगो के बारे मे केसे विचार रखते होगे..तो चलिये पढिये आज का विचारो मन्थंन..
चिंतन
एक महत्मा रोज सुबह गगां मे नहाने जाते थे, स्नान करने के पश्चात महत्मा जी वहा थोडी देर धयान भी करते थे,जेसे महत्मा जी रोजाना वहा आते थे, एक बदमाश भी रोजाना वहा घुमने आता, ओर महत्मा जी को खुब गालिया देता,महत्मा जी उसे कुछ ना कहते चुपचाप वहा से मुस्कुरा कर चले जाते,यु ही कई साल बीत गये, एक दिन महात्मा जी ने स्नान किया ध्यान किया थोडी पुजा की,फ़िर देखा आज वो बदमाश नही आया,महात्मा जी ने लोगो से पुछा उस के बारे तो पता चला कि वो तो बिमार हे,महात्मा जी ने थोडी सी जडी बुटियो को लिया, ओर थोडे से फ़ल ले कर उस बदमाश के घर गये,ओर उस का हाल पुछा साथ मे दवा ओर फ़ल भी दिये,बदमाश उठा ओर महात्मा जी के चरणो पर झुक कर माफ़ी मागी,ओर अपने किये पर शर्मिदा भी हुया, फ़िर कभी भी किसी को गालिया ना देने का वचन दिया,अच्छाई के आगे बुराई की हार हुई

1 comment:

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया!!अच्छा लिखा है।