05/03/08

चिंतन (स्वभाव )

आज का चिंतन हमे कभी भी किसी भी हालत मे अपने अच्छे गुण नही छोडने चहिये, यह चिंतन मेने बचपन मे एक बुजुर्ग से सुना था,ओर अपने बच्चो को किसी ना किसी रुप मे सुनाता रहता हू, बस कहानी बदली होती हे,तो आप भी पढिये आज के चिंतन कॊ...
एक बार बहुत से लोग नदी के किनारे किनारे जा रहे थे, शयाद किसी मंदिर या मठ के दर्शन करने जा रहे थे, उन्ही लोगो मे एक साधु बाबा भी थे,जो एक लय मे राम राम बोलते,उन के बाद आस पास वाले लोग भी बाबा के स्वर मे स्वर मिला कर राम बोलते,बहुत ही अच्छा लग रहा था, लोग भी गर्मी से बचने के लिये नदी किनारे पेडो की छाया मे बाबा के साथ आगे बढ रहे थे, अचानक बाबा की आवाज आनी बन्द हो गई.लोगो ने देखा तो बाबा नदी के पानी मे एक बिच्छू को जो डुब रहा था,अपनी अंजली मे उठा कर बाहर लाने की कोशिश करते, ओर हर बार बिच्छू बाबा को डंक मारे, बिच्छु हाथ से फ़िर पानी मे गिर जाये बाबा फ़िर उसे बाहर निकाले की कॊशिश करे, डंक लगने से बाबा को दर्द होती हाथ हिलता बिच्छू फ़िर पानी मे, अब लोगो ने देखा बार बार बही खेल, उन मे से कुछ लोग ने कहा बाबा छोडो मरने दो, वो तो जानवर हे, लेकिन आप को तो अकल होनी चहिये उस ने कितनी बार आप को डंक मारा ओर आप उसे हर बार पगालो की तरह से बार बार बचा रहे हे, बाबा चुप रहे ओर अन्त मे उस बिच्छू को नदी के किनारे एक सुरक्षित जगह पर छोड दिया.
अब बाबा ने उन लोगो से कहा देखो बिच्छू का स्वभाव डंक मारना हे, ओर वो मरने वाला हे लेकिन उस ने अपना स्वभाव नही छोडा, मे तो एक आदमी हू, ओर बाबा, मे कयो अपना स्वभाव छोड दु.
हमे कभी भी दुसरे की बुराई देख कर अपनी अच्छाईया नही त्यागनी चहिये, बुरे के साथ भी अच्छई करनी चहिये.

1 comment:

Dr.Parveen Chopra said...

भाटिया जी, यह पोस्ट पढ़ कर बहुत अच्छा लगा...कल वाली साधु और गुड़ वाली बात भी बहुत बढ़िया लगी थी और कल रात के समय खाना खाते हुये मैंने अपनी फैमिली के साथ वह शेयर भी की थी क्योंकि उस से हम सब को बहुत कुछ सीखने को मिलता है।