17/03/08

चिंतन जीव ओर हम

आज का चिंतन हम ने जीव जन्तुओ पर लिया हे, हमारे जीवन मे इन जीव जन्तुओ की कितनी महता हे,आज दुनिया को छोडो भारत मे ही जानवारो ओर जीव जन्तुओ की कितनी ही जातिया लुप्त हो रही हे.सभी जीव जन्तु किसी ना किसी रुप मे उपयोगी हे, हमे जीव जन्तुओ को लुप्त होने से बचाना चहिये... तो पढिये आज का चिंतन
जींव जन्तु
बहुत समय पहले भरत पुर के राजा ने अपने पुरे राज्य मे ढुगढुई करवा दी की पुरे देश मे मक्खियओ ओर मकडियो को जला कर पकड कर मार दो, इन का पुरी तरह से खातमा कर दो,ओर जो भी नागरिक जितनी भी मकडिया ओर मक्खिया मार कर लाये गा, उसे उतना बडा ईनाम दिया जाये गा,ओर लोग राजा की बात सुन कर हंसते भी कई लोग इस काम पर भी लग गये.
तभी एक दिन राम पुर के राजा ने भरत पुर पर हमला कर दिया,भरत पुर कि सेना थोडी कमजोर थी, सो हारने लगी ओर सेना ने किसी तरह से राजा को वहा से निकाल कर जगल मे भेज दिया,अब सारी रात राजा जगल मे चलता रहा,दुसरे दिन भी दोपहर तक राजा चलता रहा,ओर दुशमनॊ कि पहुच दुर पहुच कर राजा को थोडी तसल्ली हुई,ओर आराम करने के लिये एक पेड के नीचे सो गया, थोडी देर मे ही राजा की आंख खुली कयोकि बहा बहुत सी मक्खिया थी एक दो मक्खियो ने राजा को डंक भी मारा,राजा वहा से उठ कर पास एक गुफ़ा मे ज कर लॆट गया,लेटते ही राजा की आंख फ़िर से लग गई कुछ समय बाद राजा के कानो मे सेनिको की आवाज पडी धयान से सुनने पर राजा को पता चला यह सेनिक दुशमन के हे ओर उसे ढुढ रही हे, तभी वो सेनिक गुफ़ा के सामने आये,एक सेनिक गुफ़ा मे झाकने लगा तो दुसरे ने कहा अरे दिखता नहि गुफ़ा के मुहं पर कितना बडा मकडी का जाला हे,यहां केसे घुस सकता हे राजा, ओर सिपाही वहा से चले गये,
रात को राजा वहा से निकल कर अपने भाई राजा के राज्य मे पहुच कर , भाई को सारी बात बातई ओर रात को ही भाई के साथ मिल कर ,दुशमन राजा को हरा कर अपना राज्य वापिस लिया, ओर घोषना की कि राज्य मे जीव हत्या बिलकुल बन्द हॊ,क्योकि जीव जनुतो ने ही राजा की जान बचाई .

2 comments:

परमजीत बाली said...

आप का ब्लोग बहुत सुन्दर है।सामयिक चितंन है।

राज भाटिय़ा said...

परमजीत जी बहुत बहुत धन्यवाद.