08/03/08

चिंतन ( संगत का असर )

आज का चिंतन, अक्सर देखा गया हे हम जेसे माहोल मे रहते हे,जिस देश मे,जिस जगह रहते हे वहा का काफ़ी असर हम पर पढता हे,आज का चिंतन पढिये....
संगत का असर
एक चोर सुबह सुबह एक मन्दिर मे चोरी के उदेश्या से घुसा,अन्दर जा कर वो चारो ओर देखने लगा की कहा कहा चोरी कर सकता हु, तभी उसने देखा कुछ लोग मन्दिर मे आ रहे हे,चोर झट से सामने वाले पेड पर चढ गया ओर पत्तो के बीच मे छिप कर बेठ गया.
आज शिव रत्रि थी, इस लिये भगत लोग सुबह सुबह ही मन्दिर मे आगये, सभी लोगो ने आज भगवान शिव का व्रत रखा था, यानि सभी भुखे पेट थे,लेकिन खुश थे, फ़िर हर भगत अपनी हिम्मत के हिसाब से चढावा भी चढा रहा था, फ़िर सब ने भजन भी किये,ऊपर बेठा चोर सब देख सुन रहा था,चोर ने सोचा मे तो कभी मन्दिर आया भी नही, अन्जाने मे ही सही आज चोर का भी उप्वास हो गया, ओर सारा दिन उस ने भी भजन सुने आरती सुनी,कभी कभी चोर भी साथ मे गुन गुनाने लगता था,
दिन बीत गया, रात हुई पुजारी जी ने शाम की आरती की शिव जी की आरती की भोग लगाया, सब ने एक दुसरे को शिवरत्रि की बधाई दी,फ़िर सब अपने अपने घर चले गये.
पुजारी जी भी अपने कमरे मे चले गये,चोर धीरे से नीचे उतरा जेसे ही उसने आरती के पेसो को छुना चाहा उस की अन्तरात्मा से आवाज आई, चोर ने झट से हाथ पीछे खीच लिया, ओर सोचने लगा यहा आज सारा दिन लोग अपनी मेहनत का पेसा खुशी से भगवान को चढ रहे थे, ओर भजन कर रहे थे,उन भजनो मे वो भगवान से माफ़ी मांग रहे थे,शायाद जॊ पाप उन्होने किये भी ना हो,उन पापो की ,ओर एक मे हू चोर वही शिव के चरणो मे सर झुका कर बोला ए भगवान आज के बाद मे कभी भी चोरी नही करुगा,अपनी मेहनत से कमाउगा उसी से पेट भरुगा,उस दिन से उस चोर ने चोरी करना छोड दिया ओर जो धन जमा था सब को लोटा दिया
एक दिन की संगत ने चोर को बदल दिया,

4 comments:

sunita (shanoo) said...

बहुत अच्छा चिन्तन है...बचपन में एसी बहुत सी कहानीयाँ हमे दादी माँ सुनाया करती थी...:)

दिनेशराय द्विवेदी said...

संगत का असर तो होता ही है।

anitakumar said...

यही कहानी मैंने कुछ दिन पहले पढ़ी थी सचमुच प्रेरणादायी है कहानी।
राज जी आप मेरे ब्लोग पर आए मुझे अच्छा लगा, आप का धन्यवाद करने के लिए आप का ई-मेल पता ढूंढने आयी थी मिला नहीं इस लिए यहीं धन्यवाद कर जा रही हूँ। कृपया अपना ई-मेल पता दें।

राज भाटिय़ा said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद,आप मेरे ब्लोग पर आये ओर टिपण्णी दी.