20/03/08

चिंतन नादान

आज का विचार,भारत मे हर शहर, कस्वे,ओर गांव मे मन्दिर, मस्जिद ओर गुरुदुवारे मे आप ने अकसर देखा होगा,अन्दर जॊ भी प्रोग्राम चलता हे आप उसे १,२ किमी की दुरी से ही सुन सकते हे,लेकिन यह लौउड्स्पीकर किस लिये ? जिसने भी भजन , कीर्तन, ओर नमाज मे हिस्सा लेना हे वो सही वक्त पर अपने पुजा वाले स्थान पर पहुच जाता हे, तो कया यह उपर बाले को सुनाने को,लेकिन सुना हे उपर वाला तो आप के दिल की सुन लेता हे, फ़िर कया उन बच्चो को जिन की परिक्षा सिर पर हे, यह उन बुजुर्गो, ओर उन बीमारो को तगं करने के लिये, जो सारी रात सो नही पाते, इन सब बातो को ध्यान मे रख कर पढे आज का चिंतन...
नादान
शहर मे रोजाना सुबह सुबह ४,०० बजे प्रभात फ़ेरी निकलती हे, यह फ़ेरी आज कल से नही सदिओ के निकलती हे, इस फ़ेरी मे शहर के जाने माने सेठ लोग, ड्रा, वकील, व्यापारी ओर आम शहरी सभी लोग नंगे पांव होते, ओर फ़ेरी मे आने से पहले सभी लोग नहाते जरुर थे,जिस के घर के सामने से गुजरती बो भी फ़ेरी मे शामिल हो जाता,कोई भजन गाता तो कोई तरह डोलक पर ताल देता, फ़िर यह फ़ेरी एक मन्दिर पर जा कर समाप्त हॊ जाती, ओर लोग फ़िर अपने अपने कामो पर लग जाते.
अरे नही हां तो एक ऎसा व्यक्ति भी था जॊ इन का विरोध भी करता था, उस का काम था रोजाना सुबह सवेरे ३ बजे उठना, ओर छोटे, बडे पत्थर इक्क्ठे करना, ओर फ़िर एक पुराने मन्दिर की छत पर चढ कर फ़ेरी का इन्तजार करना, जब प्र्भात फ़ेरी उस जगह से निकलती तो वो आदमी लोगो को गलिया देता ओर पत्थर मारता, कुछ लोगो ने कई बार उसे रोका मारा पीटा, लेकिन वो नही रुका ओर सभी प्रभात फ़ेरी वालो को पखण्डी कहता,धीरे धीरे लोगो ने उस की ओर धयान देना बन्द कर दिया,सभई ने सोचा यह कोई सर फ़िरा नास्तिक हे जो भगवान को नही मानता वर्ना भगवान के भगतो को क्यओ मरता, यह सिलसिला कई साल चला, प्रभात फ़ेरी का आना, उस आदमी का पत्थर मारना, एक दिन बहुत जोरो से तुफ़ान आया, ओर सारी रात बरसात भी होती रही, शहर मे तुफ़ान ने बहुत नुक्सान भी किया, पडिंत जी ने सभी के घरो मे सन्देश पहुचा दिया आज पहली बार हे जब प्रभात फ़ेरी नही निकले गी, आज सब घर पर ही पुजा पाठ कर ले, लेकिन वो आदमी आज भी सुबह ३ बजे उठ कर अपना काम कर के उसी स्थान पर बेठा फ़ेरी का इन्तजार कर रहा हे, ५ बज गये फ़ेरी नही आई, तभी उसे आवाज आई किस का इन्तजार कर रहे हॊ,आदमी ने अपने हि धयान मे बिना देखे कहा उन पखन्डियो का, फ़िर आवाज आई आज वो नही आये गे, इस बार आदमी ने पलट के देखा तो साक्षत भगवान खडे हे, उस आदमी ने देखा ओर भगवान को प्रणाम किया, भगवान वोले तुम कयो उन लोगो को तंग करते हॊ ? उस आदमी ने कहा भगवान यह लोग शहर के अन्य लोगो को अपने शोर से तंग करते हे, बुजुर्ग लोगो की आंख लगती हे तो इन के शोर से वो तंग होते हे, बच्चे पढ नही सकते, फ़िर इन के कई लोग अन्या लोगो को मजवुर करते हे, प्रभात फ़ेरी मे आने कॊ, भगवान वोले वत्स हम सब जानते हे, यह लोग नादान हे, यह मुझे तो मानते हे,लेकिन मेरा कहा नही मानते, जेसे एक नलायक बेटा अपने बाप को तो बाप बाप कहता हे लेकिन उसका कहना नही मानता, यह लोग भी मेरे नलायक बच्चे हे,अगर यह लायक बच्चे होते तो मेरा कहना भी मानते, इतना कह कर भगवान अन्तर्ध्यान होगये.

3 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

भाटिया जी। आज की कथा में एक सौ एक नम्बर। भाई सही बात कही है आप ने।

mehek said...

siddhi sachhi baat kehti kahani,bahut khub.sab sikh lena chahiye is lahani se.bhagwan dil ki pukar sunte hai.

राज भाटिय़ा said...

आप सब का शुक्रिया.