21/02/08

गालिया वो भी बच्चो के मूख से...

हम २,३ साल मे घर ( भारत ) आते हे,एक डेढ महिना भारत मे रहे, अगस्त ओर सितम्बर मे ही आना होता हे,सभी से मिले घर मे ससुराल मे ,यह खाया वो खाया बिमार हुये,तगं हुये,लेकिन बहुत सी यादे ले कर वपिस आते हे, एक ऎसी ही याद जिसने भारत मे हमारे अडोसी पडोसी ओर जान पह्चान वालो के बच्चो की गालिया छुड्वा दी।
बच्चे सभी गलिया निकलते हे, मां बाप कितना ही साफ़ई दे, मेरे बच्चे भी यहां की भाषा मे शयाद गालिया निकालते हो ओर हमारे सामने शरीफ़ बन जाते हो,बात ५,६ साल पहले की हे जब बच्चे छोटे थे, एक बार हम जब भारत आये तो मेरी माता जी ने आसपडोस के हम उम्र बच्चो को मेरे बच्चो से मिलवया, इन बच्चो मे मेरे छोटे भाई का भी लड्का था,मेरे बच्चो के लिये सब कुछ नया था, नयी खेले,नयी बाते,उन का दिल बहुत लगा,इन के साथ आसपडोस के बच्चो का दिल भी बहुत लगा, सभी की कोशिश होती बच्चे उन के साथ ज्यादा खेले, लेकिन दो दिनो मे मेरे बच्चो के कारण दो तीन बच्चो को उन के मां बाप से अच्छी डाटं पडी, ओर मेरी माता जी ने भी उन्हे डाटं,लेकिन उन दो दिनो के बाद सभी बच्चे बहुत सयाने बन गये,
हुया जु की कई बच्चे खेलते खेलते आपस मे गाली निकाल देते थे,वो गाली मेरे बच्चो ने सुनी नही थी, इन के लिये वो नई चीज थी, अब जिस के घर मे खेल रहे हे,अगर किसी बच्चे ने गाली निकाली तो यह जिक्षाषा वस पुछ्ते उस गाली का मतलब अब बच्चे शरमा जाते,ओर नही बताते या उन नादन को भी नही मालूम होता होगा, फ़िर जो भी नजदीक होता, अकलं आटीं उसी से सीधा उसी से पुछ लेते,कभी दादी से पुछते,अब सुनने बाला इन्हे देख कर समझ जाता, फ़िर पुछ्ताश होती,दो दिन मे सभी बच्चो की गाली बन्द, अब बच्चे हमारे बाद मे भी गालिया नही निकलते।
पिछली बार सभी बच्चो ने मिल कर अपने आसपास सफ़ाई की ओर बच्चो को देख कर दुसरे दिन बडे भी सफ़ाई मे लग गये, पुरा एरिया साफ़्सुधरा हो गया,किसी ने किसी को नही कहा सफ़ाई के लिये सभी खुद आते गये तो पुरा एरिया जगमग करने लगा.

3 comments:

visfot said...

अपने इधर तो बच्चा गाली दे तो कहते हैं कि बड़ा होनहार है देखो कैसी-कैसी गालियां सीख गया है.

झकाझक टाइम्स said...

बात आपकी सच्ची है
जब नहीं जानते तब
गाली लगती लस्सी सी है
जो बाद में शब्दों में लिपट
जाती रस्सी सी है.

विस्फोट ने भी कर दिया विस्फोट
खोट को भी दी है देखो कैसी ओट.

राज भाटिय़ा said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद,ओर यह कविता भी खुब अच्छी लगी.
विस्फोट ने भी कर दिया विस्फोट
खोट को भी दी है देखो कैसी ओट.
धन्यवाद