15/01/08

हमारी ईटली यात्रा भाग १

बच्चो की छुट्टिया ३०,०७,०७ शुक्र्वार को शुरु हो गई,ज्यादातर लोग उसी दिन दोपाहर को ही निकल गये थे, लेकिन पिछली बार की याद कर के मे दो दिन बाद् मे निकला (हाई बे पर बहुत भीड हो जाती हे,ओर एक्सिडेन्ट वगेरा का भी ज्यादा खतरा रहता हे।

इस बार हमारा छुट्टिया मनाने का प्रोग्राम बना था ईटली का,(जर्मन मे गर्मी बहुत ही कम पडती हे,ओर बहुत ही अजीब सी ) सोमवार सुबह ५,०० बजे हम घर से निकले, बाहर बहुत ही तेज बरसात हो रही थी,थोडी थोडी सर्दी भी थी,कार मे मुझे हीटर चलाना पडा,हम अस्ट्रिया की तरफ़ चल पडे,अभी हाई बे शुरु नही हुआ था,फ़िर भी कभी ८०,तो कभी १००क्म्/प्रति घण्टा के बीच हम रोशेनाहायेम(एक शहर) पहुच गए यहा से हमने हईबे पकडी लेकिन यहां भी काफ़ी तेज नही चला पाये कयो की जर्मन की सीमा यहां से ज्यादा दुर नही थी ओर हमे सीमा से पहले ही अस्ट्रिया के लिये सडक टेक्स के लिये टोकन लेना था,सीमा से थोडा पहले ही हमे टोल्टेक्स का सकेंत मिल गया,यहा से मेने दो महिने वाला टोकन लिया अभी घडी मे ५,३० ही बजे थे,तो रुकने का काम ही नही था,फ़िर अभी तो९०० क्म दुर जाना था,जहा से निकल कर आगे बडे,लेकिन यहां स्पीड लिमट १२०-१३०( जो जर्मन के हिसाब से बहुत कम हे)हम आगे बडे बरसात अभी भी पुरे जोर शोर से हो रही थी,ओर अब हम अस्ट्रिया की अल्पन पहाडियों मे यहां से हम बरेना की तरफ़ बड रहे थे(,यह पहाड एक दिवार के रुप मे हें जो युरोप की ठ्ण्डी को रोके रखती हे) हम धीरे धीरे काफ़ी ऊचे आ गये थे,चारो ओर ऊचे ऊचे पहाड कभी नीचे घाटी बहुत गहरी कभी सुरग, कभी पुल फ़िर सुरग,लेकिन मेरा तो पुरा धयान समाने था,बच्चे लोग मस्ती से सो रहे थे,ओर बीबी भी कभी कभी झापकी ले रही थी ओर हम ने बरेना पास करीब ७,०० बजे के करीब पार कर लिया, अब बरसात भी बहुत कम हो गई थी, बरेना पास पर हमे फ़िर से ८€ देने पडे,थोडा आगे जाने पर हमे ईटली के टोलटेक्स दिखाई दिया,हमने स्पीड के हिसाब से कार धीरे की फ़िर आगे बनी अलग अलग लाईन मे लग गये यहां कोई आदमी काम नही करता सब ओटोमेटिक हे, हम ने बट्न दबा कर आपनी चिट निकाली ओर आगे चल पडे,अब थोडी गर्मी मह्सुस हुई मेने हीटर बन्द कर थोडा आगे गये तो ओर गर्मी लगी तब तक सब जाग गये थे,अब हम ने अपने स्बेटर भी उतार दिये,गर्मी फ़िर भी कम नही हुइ,अब ८,०० बजने बाले थे सोचा कही कार रोक कर नाशता किया जाये,थोडी देर मे हमे पेट्रोलपम्प के साईन मिले....

शेष कल.....जाने से पहले अल्पन की पहडियो से लिया एक चित्र...

3 comments:

Dard Hindustani (पंकज अवधिया) said...

अच्छे से लिख रहे है आप। ऐसा लग रहा है कि कार मे हम भी है पर सो नही रहे। :)


अगले भाग की प्रतीक्षा है।

Anonymous said...
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राज भाटिय़ा said...

ध्न्यवाद आप हिम्मत बढाते रहे.