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17/04/11

मै ओर मेरी हल्दी


आज कई दिनो बाद आप से मिलने आया हुं, कारण...  हमारी साली साहिबा हमारे यहां आई थी, जिन के संग सारा दिन आवारा गर्दी, कभी यहां घुमने गये तो कभी वहां, यानि पुरा युरोप एक बार फ़िर से घुम लिये पिछले १० दिनो मे, बीच बीच मे जब भी समय मिलता मै नेट पर कुछ देर के लिये जरुर आता था, ओर दिन मे एक टिपण्णी जरुर दे देता था, फ़िर साली साहिबा अपने बाल बच्चो के संग वापिस चली गई, हमे छोड के ... जब कि मोसम बहुत अच्छा था तो हम ने अपने गार्डन मे ही थोडी बहुत नही... बहुत ज्यादा सफ़ाई कर ली, ओर क्यारी तेयार कर ली, जिस मे कल धानिया, पुदिना, हरी मिर्च के बीज ओर सरसो वो दुंगा, यहां माली भी तो खुद बनाना पडता हे,ओर यहां का धानिया उतना अच्छा नही होता जितना खुश्बु दार अपना धानिया होता हे, ओर पुदिना तो बहुत किस्म का मिलता हे, लेकिन अपने वाला ही हमे पसंद हे, इस लिये वोही वो लेते हे, फ़िर सरसो तो यहां खेतो मे खुब होती हे, लेकिन उस पर दवा बहुत छिडकते हे, दुसरा उसे हम तोड भी नही सकते बिना पुछे, क्योकि वो चोरी हुयी इस लिये हम उसे  भी वो लेते हे, थोडी जगह मिलती हे तो उस मे हरी मिर्च, ओर प्याज वो लेते हे, बाकी जगह पर  फ़ुल ओर घास , हां गमलो मे टमाटर भी तो बोते हे, ओर कद्दू भी बोते हे, एक बार हमारे यहां कद्दू २५ किलो का हुआ था.

हम जब भी यहां अपना खाना( भारतिया) खाते हे तो दांत पीले पड जाते थे, बच्चो ने तो सब्जी खानी ही छोड दी या बिना हल्दी के सब्जी बनती थी, किसी ने बताया की हल्दी मे यह रंग डालते हे, जो सब्जी मे रंगत लाता हे, ओर हमे तो स्वादिस्ट सब्जी चाहिये बिना रंग के, तो भाई पिछली बार हम साबूत हल्दी १ किलो लेते आये भारत से, अब इसे यहां पीसे कैसे, पहले हथोडी से तोडनी चाही, लेकिन बिखर जाये, फ़िर पेपर मे लपेट कर तोडनी चाही, वो भी काम नही बना जो थोडी बहुत टूटी उसे पीसना बहुत कठिन, पुरे सप्ताह मे दो चम्मच ही पीस पाये.

लेकिन भारतिया दिमाग जुगाड से ही काम चलता हे ना, जैसे हमारा देश भी तो जुगाड से.... तो जनाब हमने पुरानी जींस का एक हिस्सा जेब की तरह से सिल कर उस मे हल्दी को पहले तोड कर ( हाथोडी से) छोटा किया, फ़िर उसे अपनी छोटी कुंडी मे थोडा ओर छोटा किया, फ़िर उसे अपनी चक्की मे पीस कर बारीक किया, ओर फ़िर उस से सब्जी बनाई जिस मे स्बाद बहुत अच्छा बना सब्जी का, ओर रंग बिलकुल भी नही, दांत बिलकुल साफ़, आप भी देखे हमारी चक्की नीचे सब चित्र दे रहा हुं.

वैसे हम गर्म मासाला, ओर अन्य मसाले भी घर पर ही पीस लेते हे, बाजार से पीसे समान से डर लगता हे, वैसे तो यहां मिलाबट नही होती लेकिन अपने लोग रंग तो मिला ही देते हे... चलिये अब हमारी चक्की देख ले, वैसे इस चक्की वाली मोटर से हम सब्जियां भी काट लेते हे, आटा भी गुथ लेते हे, चिपस, भी बनाती हे कीमा भी बन जाता हे, ओर फ़लो का जुस भी इसी से निकला जा सकता हे.



 इस मशीन मे दो बार इस हल्दी को डाला पहली बात चने जितनी बडी हल्दी थी, जब बार निकली तो काफ़ी बारीक थी, फ़िर दोबारा डाली तो पाऊडर बन कर निकली, आधा किलो को समय करीब १ घंटा लगा, साबूत से पाऊडर बनाने मे लेकिन बिलकुल साफ़ सुधरी ओर बिना रंग के. बताई केसी लगी.
वैसे आप लोग भी सब मसाले घर मे ही पीसे तो कितनी मिलावट से बच सकते हे, गर्म मसाला जो पिसा पिसाया बाजार मे मिलता हे उस मे क्या क्या मिलाया जाता हे अगर यहां लिख दुं तो आप आज खाना नही खायेगे:) आज तो घर घर मे मिक्सर हे, तो घर मे ही गर्म मसाले ओर मिर्च ओर अन्य समाग्री पीस ले हल्दी भी घर मे ही किसी से पिसवा ले, मिलवटी खाने से कुछ तो बचता हो.

आज भी मेहमान आ रहे हे, कुछ ही समय के बाद, पता नही कितने दिन रहेगे, हमे तो खुशी होती हे, मेहमान आने पर, लेकिन उस के कारण आप सब से दुर हो जाता हुं, चलिये अब कपडे बदल लुं पता नही कब डोर बेल बजे... राम राम

04/12/09

पिन्नी केसे बनाये? कोई बतयेगा क्या?

अजी केसे है आप सब, सर्दी भी तो बढ गई है अब ... हमारे यहां  अब कई सालो से सर्दी सही ढंग से नही पढ रही, अभी तक दो तीन बार बर्फ़ गिर चुकी होती, लेकिन पिछले साल को छोड कर मोसम अपने सही रुप मै नही आया अभी, वेसे सर्दी तो है बहुत लेकिन जितनी आज कल मै होनी चाहिये उतनी नही, ओर इस चक्कर मै लोग भी बहुत बीमार हो जाते है.

कुछ दिनो से मेरी टांगो मे भयकंर दर्द होता है, बस इन्ही दिनो मे ज्यादा होता है, ओर मै ऎलो पेथी की दवा बहुत कम खाता हुं. ओर इस दर्द की वजह से मै कई काम भी नही कर पाता, भारत मै लोग सर्दियो मै पिन्नी ( पिण्णी) या अलसी के लड्डू या कुछ ओर नाम होगा बनाते है,शयाद इसी कारण की शरीर को यह पिन्नियां मजबुत करती हो, मै जब पिछले दिनो भारत आया तो  कमर कस( खस खस) गोंद ले कर आया था, ओर अलसी हमारे पास कई सालो की पडी है, अन्य मेवे भी घर मै पडे है, देसी घी भी मलाई जमा कर कर के हमारी बीबी ने बनाया है, लेकिन हमे यह पिन्नी बनानी नही आती, इस कि विधि केसे है हमे पता नही यहां रहने वाले भारतिया भी हमारी तरह से अन्जान है.

क्या आप लोग हमारी मदद करेगे  कि कोन सी चीज कितनी मात्रा मै ओर केसे डालनी है, कोन सी चीज कितनी भुनानी है, अगर कोई इस बारे मै जानता हो या आप के घर मै मां दादी या आप की बीबी इसे बानती हो , या कोई महिला इसे पढ कर मेरी मदद कर सके तो हम उन का दिल से   आभार अभी से करते है.

तो इतना जरुर बताये कि कितनी मात्रा मै कोन कोन सा समान इन मै डाले, ओर  हमे कितनी पिन्नियां एक दिन मै खानी चाहिये अलसी वाली, ओर बच्चो को यह दे या ना दे, आप के जबाब की इंतजार मै, अगर आप टिपण्णी मै अपनी राय नही देना चाहते तो कृप्या मुझे मेल कर दे, मेल का पता मेरे ब्लांग पर मोजूद है

24/12/08

काम की बाते !! सर्दी से बचाव

्वेसे तो सभी को पता है कि सर्दी से बचाव केसे करना है, लेकिन कभी कभी दुसरो की सलाह भी काम आ जाती है, जब हम नये नये यहां आये तो हमे सिर्फ़ काली चाय ( भारतीया चाय) ही दुनिया की नम्बर एक लगती थी, ओर हमारे जर्मन साथी कभी सोंफ़ की, कभी नीबूं की चाय तो कभी कोई ओर चाये पीते, हम अकसर सोचते थे कि यह गोरो के चोंचले ही है :)
लेकिन वक्त ने समझा दिया की यह चोंचले नही एक जरुरत है, ओर अब हम भी अब सर्दियो मे नींबू की चाय खुब पीते है, ओर दिन मे कई बार, एक ताजा नींबू के ४,६ टुकडे कर के उसे ६ गिलास या मग्गे ( छोटे कप नही ) पानी मे डाल कर खुब उबाले ५,६ मिन्ट फ़िर उसे गिलास या मग्गे मै डाल ले, ओर फ़िर उस मे चीनी, या शहद अपनी इच्छा अनुसार डाल ले, या कुछ भी ना डाले लेकिन नींबू का बचा टुकडा नीचोड ले ओर इसे गर्मा गर्म धीरे धीरे पिये, फ़िर बताये आप का जुकाम , बलगम, कहां है, अगर आप इसे रोजना दिन मे चार पांच बार पिये तो पुरी सर्दियो मे आप बिमारी से बचे रह सकते है. नींबू को सिर्फ़ धोना है छिलका नही उतारना छिलके समेत उस के टुकडे कर के उबाले,

अगर आप को या बच्चो को खांसी है तो एक चम्मच असली शहद मे एक चुटकी हल्दी मिला कर, मामुली सी गर्म कर ले ओर उसे चाट ले रात को सोने से पहले फ़िर कुछ ना पीये दो तीन घन्टे, सुबह आप को खुद फ़र्क महसुस होगा. इसे दो तीन दिन कर सकते है ओर हर उम्र के बच्चे को यह चटा सकते है.
पाव गर्म रखे.

06/09/08

लहसन का आचार खुद बनाय़े

आज मेने ममता जी के यहां एक लेख पढा **लहसन का आचार** मेने सोचा शायद कोई नयी बिधि बताई होगी, लेकिन लेख तो बहुत स्वाद (अच्छा ) था, लेकिन लहसन का आचार खरीद कर खाने की सलाह दी.
मेरी बीबी घर मे ही लहसन का आचार बनाती हे, जो बहुत ही स्वादिष्ट, बिलकुल ऎसा ही जेसा कि ममता जी ने बताया हे, ओर आचार बनाने मे सिर्फ़ २ मिन्ट ? जी बहुत ही आसान !!! ओर इस आचार को बडे तो क्या छोटे भी मजे से खाते हे, दुर्घन्ध भी नही आती,पेट भी साफ़ रहता हे, ओर कलोस्ट्रोन को भी कम करता हे, बाकी लहसन के सारे गुण तो आप सभी को मालुम हे, तो आप तेयार हे, इसे बनाने के लिये...
सामग्री.
२५० ग्राम लहसुन.
१/१%२ बडे चम्मच नमक.
१ बडा चम्मच लाल मिर्च (पिसी हुई)
१%२ चम्मच हल्दी पिसी हुई
२ बडे चम्मच अमचूर पिसा हुआ.
१ बडा चम्मच चीनी
१%२ छोटा चम्मच कलॊंजी.
५० ग्राम तेल( कोई सा भी)
बिधि....
अब सारी सामग्री को (तेल को नही ) यानि सारे मसाले आपिस मे अच्छी तरह से मिला ले,
लह्सून को उबालते पानी मे ८,१० मिन्ट उबाल ले, ज्यादा नही.
फ़िर इस लहसून के छीलके बहुत जल्द उतर जायेगे, फ़िर इसे उस बर्तन मे डाल ले जिस बर्तन मे आप ने आचार डालना हे, उपर से मिला हुआ सारा मसाला डाल दे, फ़िर तेल को थोडा सा गर्म कर के उस बर्तन मे डाल दे, एक बार अच्छी तरह से हिला दे,
ओर आप इसे २४ घण्टे के लिये रख दे कही भी, बस आप का आचार तेयार हे,ओर फ़िर इसे फ़्रिज मे रख दे २,३ सप्ताह से ज्यादा यह चले गा,
अगर ज्यादा मिठठा बनाना हे तो थोडी ज्यादा चीनी डाल दे,ओर उबालने के समय ध्यान रखे यह ज्यादा नही उबलना चाहिये,
अगर आप सब को यह आचार अच्छा लगे तो इस का श्रेय हमारी बीबी को जाता हे.
तो बनईये ओर खाईये फ़िर बताईये